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हल्का-फुल्का

ये सब तो कहना ही पड़ता है: ‘महिला दिवस’ विशेषांक 

महिलाओं की स्थिति वास्तव में बदले या ना बदले, लेकिन भाषणों की बड़ी-बड़ी बातें कभी नहीं बदलेंगी। सार्वजनिक मंचों पर उन बातों को दोहराना जरूरी है, जिनसे लगे कि सब ठीक चल रहा है।
7 मार्च 2025 को प्रकाशित
महिला दिवस के अवसर पर एक भाषण का प्रतीकात्मक कार्टून चित्र, जिसमें एक व्यक्ति वक्ता है और अन्य लोग श्रोता_महिला दिवस

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