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लैंगिक विषय

स्टूडियो और गांव के बीच: एक सामुदायिक आरजे का दिन

इस वीडियो में दिखेगा कि कैसे एक सामुदायिक आरजे स्क्रिप्ट, रिकॉर्डिंग और गांव के बीच अपने दिन को बांटती हैं। यह कहानी सामुदायिक रेडियो कार्यकर्ता के काम को समझने की कोशिश है।
4 सितंबर 2025 को प्रकाशित

सुनीता मिश्रा, सामुदायिक रेडियो—रेडियो मेवात की पत्रकार और वरिष्ठ आरजे होने के साथ ही फील्ड कोऑर्डिनेटर हैं। हरियाणा के नूंह जिले (जिसे मेवात के नाम से भी जाना जाता है) से संचालित यह सामुदायिक रेडियो, स्थानीय लोगों की जिंदगी और मुद्दों को आवाज देता है। सुनीता इस रेडियो की एक महत्वपूर्ण आवाज हैं—जो न केवल रिपोर्टिंग करती हैं, बल्कि महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से कार्यक्रम भी बनाती हैं।

उनका दिन सुबह जल्दी शुरू होता है—कभी रिकॉर्डिंग के लिए, तो कभी किसी गांव में मीटिंग के लिए। वे गांव-गांव जाकर महिलाओं से बातचीत करती हैं, उनकी समस्याएं समझती हैं और फिर उन्हें रेडियो पर लाकर पूरे समुदाय तक पहुंचाती हैं। सुनीता खासतौर पर घरेलू हिंसा, महिला अधिकार और कानून की जानकारी पर कार्यक्रम तैयार करती हैं। उनके लिए यह सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि बदलाव की एक यात्रा है।

‘मेरा एक दिन’ सीरीज में हम सुनीता के एक दिन की झलक दिखा रहे हैं—उनकी रिकॉर्डिंग से लेकर फील्ड विजिट तक, और उन पलों को भी, जब वह समुदाय की महिलाओं के साथ बैठकर उनसे सीखती और उन्हें सशक्त बनाती हैं।

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इस वीडियो फीचर के जरिए एक सवाल भी उठता है: सामुदायिक रेडियो में काम करने का मतलब क्या होता है? सिर्फ आवाज देना या उस आवाज तक पहुंचने के रास्ते खोलना?

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