वर्क-फ्रॉम-होम के लिए कोई वजह चाहिए क्या?
1.
आज मेरा दिमाग थोड़ा हिला हुआ है। लोगों से दूरी बनाकर काम करना चाहिए। 9:15 पर उठेंगे और 9:30 से डेस्क पर बैठेंगे।
2.
मेरी बिल्ली मेरी गोद में पसर गयी है। अब ये तो शास्त्रों में लिखा है कि जिस बिल्ली ने खुद गोद चुनी हो, उसे हिलाना ब्रह्मांड के नियमों के खिलाफ है। तो आज मैं पूरा दिन सोफे से ही ‘कड़ी मेहनत’ करने वाली हूं।
3.
मुझे अगले 24 घंटे में एक डोनर रिपोर्ट भेजनी है। तब तक होने वाला रोना-धोना दफ्तर में नहीं हो पायेगा। आखिर, मेरी भी कोई इज्जत है!
4.
मेरे हेडफोन नहीं चल रहे और बिना इनके मेरा दिन नहीं चलता— कॉल या मीटिंग लेनी हो, काम पर ध्यान देने के लिए गाने सुनने हों या दफ्तर वालों को इशारों में ही ये जताना हो कि मुझे उनके साथ दसवीं बार चाय पीने नहीं जाना!
5.
मेरे कुत्ते ने पहले मेरा मेट्रो कार्ड खाया और फिर मेरे लैपटॉप पर उल्टी कर दी।
6.
हफ्ते में दो दिन दफ्तर जाना जरूरी है और मैं एक दिन जा चुकी हूं। उस दिन हुई बातचीत की थकान अब तक उतरी नहीं है।
7.
आज तो छोटा-शनिवार…मेरा मतलब शुक्रवार है। इसलिए आज हैरी-पॉटर देखते-देखते काम किया जाएगा।
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लेखक के बारे में
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जैस्मीन बल आईडीआर में एक संपादकीय विश्लेषक हैं, जहां वह कंटेंट राइटिंग और संपादन से जुड़े काम करती हैं। इससे पहले इन्होंने वीवा बुक्स में एक संपादक के रूप में और सोफिया विश्वविद्यालय, जापान में एफएलए राइटिंग सेंटर में एक ट्यूटर के रूप में काम किया है। जैस्मीन ने वैश्विक अध्ययन और अंग्रेजी में एमए और सामाजिक विज्ञान में बीए किया है।
