सिग्नल की तलाश में धड़गांव के गांव

महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले के धड़गांव ब्लॉक के दूर-दराज के गांवों में ई-केवाईसी सत्यापन के कारण सरकारी योजनाओं के लिए आवेदन करना कठिन होता जा रहा है। उदाहरण के लिए, मुख्यमंत्री माझी लड़की बहन ऐसी ही एक योजना है, जिसके तहत 21 से 65 वर्ष की आयु की पात्र महिलाओं को प्रति माह 1500 रुपये की सहायता मिलती है।
यहां के स्थानीय निवासियों को ई-केवाईसी सत्यापन के लिए जरूरी वन-टाइम पासवर्ड (ओटीपी) प्राप्त करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उन्हें स्थिर मोबाइल नेटवर्क पाने के लिए, तंग रास्तों और खड़ी पहाड़ियों वाले ऊबड़-खाबड़ इलाकों को पार करते हुए दो से तीन घंटे तक चलना पड़ता है। यहां तक कि कुछ लोग सिग्नल ढूंढने के लिए पेड़ों या छोटी पहाड़ियों तक पर चढ़ने को मजबूर हैं। कई महिलाएं मोबाइल पर ओटीपी आने की उम्मीद लगाए, अपने बच्चों को गोद में लेकर खाने-पीने के थैले समेत कई घंटों इंतजार करती हैं।
अक्सर, गांव में कोई छोटी पहाड़ी या पेड़ मोबाइल नेटवर्क पाने का स्थल बन जाता है। महिलाएं वहां इकट्ठा होती हैं और तेज धूप में अपने मोबाइल फोन को ऊपर उठाए ओटीपी आने का इंतजार करती हैं। किसी-किसी दिन ओटीपी आता ही नहीं है और उन्हें अगले दिन फिर से यही प्रक्रिया दोहरानी पड़ती है। इसके कारण धड़गांव के कई परिवारों को रोजगार और कमाई का एक दिन गंवाना पड़ता है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता इन महिलाओं को ऑफलाइन फॉर्म भरने में मदद जरूर करती हैं, लेकिन ओटीपी सत्यापन न केवल महिलाओं के लिए, बल्कि उनके पिता या पतियों के लिए भी अनिवार्य है।
कुछ महिलाएं आस-पास के कस्बों और गांवों में भी जाने की कोशिश करती हैं, जहां कनेक्टिविटी बेहतर होती है। लेकिन वहां पहुंचने के लिए उन्हें आवाजाही पर खर्च करना पड़ता है, जो लगभग 300 रुपये तक हो सकता है। पहले से ही रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे परिवारों के लिए यह एक बड़ी रकम है।
कल्पेश पवार आदिवासी जनजागृति में एक जमीनी स्तर के जनसंगठक हैं। नितेश भारद्वाज आदिवासी जनजागृति का नेतृत्व करते हैं।
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लेखक के बारे में
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कल्पेश पवार उलगुलान फॉर सोशल चेंज फाउंडेशन (आदिवासी जनजागृति) में एकाउंट मैनेजर और जमीनी स्तर के जनसंगठक कार्यकर्ता हैं। वह समुदाय सहभागिता, क्षेत्रीय समन्वयन तथा संगठनात्मक प्रक्रियाओं में सक्रिय सहयोग प्रदान करते हैं। एक नागरिक पत्रकार के रूप में उन्होंने अनेक महत्त्वपूर्ण जमीनी मुद्दों को उजागर किया है, जिससे स्थानीय आवाजों को उचित मंच और प्रतिनिधित्व प्राप्त हो सके।
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नितेश भारद्वाज महाराष्ट्र के नंदुरबार के आदिवासी क्षेत्र में कार्यरत एक सामाजिक उद्यमी और सामुदायिक लीडर हैं। वह उलगुलान फॉर सोशल चेंज फाउंडेशन (आदिवासी जनजागृति) का नेतृत्व करते हैं, जो जमीनी स्तर पर नेतृत्व और पत्रकारिता के विकास के साथ-साथ सामाजिक न्याय, सामाजिक अधिकारों की प्राप्ति और समुदाय-आधारित विकास को प्रोत्साहित करने पर केंद्रित है।