सरल कोश: फाइनेंस कमीशन या वित्त आयोग
विकास सेक्टर में तमाम प्रक्रियाओं और घटनाओं को बताने के लिए, एक खास तरह की शब्दावली का इस्तेमाल किया जाता है। आपने ऐसे कुछ शब्दों और उनके इस्तेमाल को लेकर असमंजस का सामना भी किया होगा। इसी असमंजस को दूर करने के लिए हम एक ऑडियो सीरीज ‘सरल–कोश’ लेकर आए हैं, जिसमें हम आपके इस्तेमाल में आने वाले कुछ महत्वपूर्ण शब्दों पर बात करने वाले हैं।
सरल–कोश में आज का शब्द है – फाइनेंस कमीशन यानी वित्त आयोग।
वित्त आयोग एक संवैधानिक निकाय है। भारत के राष्ट्रपति, संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत इसका गठन करते हैं। आमतौर पर हर पांच साल में, या जरूरत पड़ने पर उससे पहले, नए वित्त आयोग का गठन किया जाता है। वित्त आयोग का मुख्य काम यह तय करना होता है कि केंद्र सरकार द्वारा एकत्र किए गए टैक्स का वितरण कैसे हो। यानी, आर्थिक संसाधनों में कितना हिस्सा किस राज्य को मिलेगा। यह फैसला करते समय आयोग कई तरह की बातों को ध्यान में रखता जाता है। इसमें मुख्य रूप से राज्यों की प्रति व्यक्ति आय में अंतर, जनसंख्या, क्षेत्रफल, जनसंख्या नियंत्रण के प्रयास, वन क्षेत्र और पर्यावरण, और कर संग्रहण की दक्षता जैसे विषय शामिल हैं।
सरल शब्दों में कहें तो वित्त आयोग यह सुनिश्चित करता है कि देश की कमाई का न्यायसंगत बंटवारा हो, ताकि राज्यों और स्थानीय सरकारों के पास अपने काम ठीक से करने के लिए पर्याप्त संसाधन हों। यह समझना भी जरूरी है कि वित्त आयोग खुद कोई पैसा नहीं देता, बल्कि अपनी सिफारिशें देता है। इन्हीं सिफारिशों के आधार पर केंद्र सरकार अपने वित्तीय फैसले लेती है।
अगर आप इस सीरीज में किसी अन्य शब्द को और सरलता से समझना चाहते हैं तो हमें यूट्यूब के कॉमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।
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