जांस्कर घाटी का भेड़िया

मैं लद्दाख की जांस्कर घाटी में रहता हूं, जहां कई तरह के जंगली जानवर पाए जाते हैं। उनमें से एक है शांगकू या शांकू (जिसे तिब्बती भेड़िया भी कहा जाता है)। यह एक आला दर्जे की शिकारी नस्ल का जानवर है, जो बर्फ से ढके पहाड़ों में घूमता है। ये अक्सर जंगली आइबेक्स और चोटी पर रहने और चरने वाले दूसरे जानवरों का शिकार करते हैं। लेकिन जब उन्हें शिकार नहीं मिलता, तो शांगकू गांवों में आकर बकरियों, भेड़ों और कभी-कभी याक जैसे पालतू मवेशियों परभी हमला कर देते हैं।
यह गांवों के लिए बड़ा नुकसानदायक साबित हो सकता है, खासकर इसलिए क्योंकि याक बेहद मूल्यवान होते हैं। एक याक की कीमत लगभग 80,000 से 1,00,000 रुपये तक होती है, और उन्हें पालने-पोसने में कई साल लग जाते हैं। याक दूध और फाइबर प्रदान करते हैं, जो इस इलाके की आजीविका के लिए बेहद अहम हैं। पहाड़ों के ऊबड़-खाबड़ और दुर्गम इलाकों में इनका इस्तेमाल आवाजाही के लिए भी होता है। ऐसे में एक भी जानवर का नुकसान किसी परिवारके लिए गंभीर आर्थिक तंगी की वजह बन सकता है
इसके अतिरिक्त, हाल के वर्षों में जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियरों के पिघलने और मौसम के गर्म होने से इस क्षेत्र की वनस्पति में बड़े बदलाव आए हैं। नतीजतन, ब्लू शीप और आइबेक्स भोजन की तलाश में नीचे की तरफ मानवबस्तियों के करीब आने लगे हैं, जिससे शांगकू भी उनका पीछा करते हुए वहां पहुंच रहे हैं। इससे मानव–वन्यजीव (भेड़िया) संघर्ष लगातार गहराता जा रहा है।
प्रशासन की ओर से ऐसी नीतियां मौजूद हैं, जिनके तहत शांगकू द्वारा पशुधन के नुकसान पर लोगों को मुआवजा मिलने का प्रावधान है। लेकिन यह एक जटिल प्रक्रिया है और इसमें लंबी कागजी कार्यवाही करनी पड़ती है। समस्या यह भीहै कि सरकारी कार्यालय अक्सर घाटी से बहुत दूर होते हैं। साथ ही, यह भी निश्चित नहीं होता कि रेंजर या वॉर्डन आवेदन को मंजूरी देंगे या नहीं। यदि मंजूरी मिल भी जाए, तो मुआवजा केवल 15,000 रुपये होता है, जो एक याक कीकीमत का चौथाई भी नहीं है।
हालांकि लद्दाख के कई क्षेत्रों में विभिन्न गैर-लाभकारी संस्थाएं इस संघर्ष को कम करने के लिए काम कर रही हैं, परंतु दक्षिण-पूर्वी जांस्कर की लुंगनाक घाटी जैसे दूरदराज इलाकों में उनकी पहुंच बहुत सीमित है। परिणामस्वरूप, स्थानीयसमुदायों को पर्याप्त सहायता नहीं मिल पाती है और उन्हें खुद ही इन चुनौतियों से जूझना पड़ता है।
शांगकू को अब आईयूसीएन रेड लिस्ट में एक संकटग्रस्त प्रजाति के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
तेनज़िन लोदेन ग्रीन हब x रॉयल एनफील्ड वेस्टर्न हिमालयन हब फेलो हैं।
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लेखक के बारे में
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तेनज़िन लोदेन ग्रीन हब x रॉयल एनफील्ड वेस्टर्न हिमालयन हब फेलो हैं। वह लद्दाख के जांस्कर लुंगनाक क्षेत्र के एक यूट्यूबर और उभरते हुए फिल्म निर्माता भी हैं।