Staging Environment
कोविड-19

कोविड़-19 की वजह से बढ़ी भीड़

9 फ़रवरी 2022 को प्रकाशित

कौशल कुमार बिहार में सारण जिले के एक फेरीवाले हैं और गाँव-गाँव घूमकर बर्तन बेचते हैं। उन्होनें ग्राम वाणी के सामुदायिक मीडिया प्लैटफ़ार्म मोबाइल वाणी के अजय कुमार से बात की। अपनी इस बातचीत में उन्होनें बताया कि वह थक गए हैं और अपने काम को बदलना चाहते हैं यानी कोई दूसरा काम करना चाहते हैं। लेकिन दूसरे तरह के कामों में लगे हुए उनके दोस्तों का कहना है कि यह बेकार की बात है। उन सभी के अपने-अपने छोटे व्यापार हैं और कोविड़-19 महामारी की शुरुआत से ही इन सबकी बिक्री बुरी तरह से कम हो गई है।

कौशल का कहना है कि स्थिति गंभीर है। हर चीज की कीमत बहुत अधिक है और जनता के पास महंगी चीजें खरीदने के पैसे नहीं हैं। बिक्रेताओं की संख्या बढ़ने के कारण मांग से ज्यादा आपूर्ति की स्थिति पैदा हो गई है। इससे कौशल जैसे लोग मुश्किल में आ गए हैं। जहां पहले वह हर दिन 500 रुपए या उससे अधिक कमा लेते थे वहीं अब यह राशि घटकर 100–500 रुपए हो गई है।

मुद्रास्फीति और महामारी के कारण प्रतिस्पर्धा में हुई वृद्धि का कौशल जैसे रेहड़ी-पटरी वालों पर बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ा है। 

ग्राम वाणी एक सामाजिक तकनीकी कंपनी है जो समुदायों को अपनी आवाज़ में कहानियाँ बनाने, आवाज बुलंद करने और साझा करने में सक्षम बनाती है। अजय कुमार 2016 से मोबाइल वाणी में एक स्वयंसेवी के रूप में काम कर रहे हैं।

इस लेख को अंग्रेज़ी में पढ़ें

अधिक जानें: पढ़ें कि महामारी ने कैसे महिला उद्यमियों को प्रभावित किया।

अधिक करें: संस्था और उनके काम को समझने और समर्थन करने के लिए लेखक से contact@gramvaani.org पर संपर्क करें।

शेयर करे

लेखक के बारे में