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हल्का-फुल्का

ये सब तो कहना ही पड़ता है: ‘महिला दिवस’ विशेषांक 

महिलाओं की स्थिति वास्तव में बदले या ना बदले, लेकिन भाषणों की बड़ी-बड़ी बातें कभी नहीं बदलेंगी। सार्वजनिक मंचों पर उन बातों को दोहराना जरूरी है, जिनसे लगे कि सब ठीक चल रहा है।
महिला दिवस पर सुनी-सुनाई बातों को दोहराते दो व्यक्तियों का कार्टून चित्र_

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