‘नारीवादी शिक्षा’ सुनकर आपके मन में क्या आता है?
देश के 25 लोग हमें बता रहे हैं कि वे कैसा महसूस करते हैं, क्या सोचते हैं, उन्हें क्या ध्यान आता है जब वे इन दो शब्दों को एक साथ सुनते हैं: नारीवादी शिक्षा।
द थर्ड आई में हम इन सवालों से इस विचार पर आपका ध्यान लाना चाहते हैं कि ज्ञान और सीखना सिर्फ एक विशेषाधिकार नहीं है। ये केवल वो जानीमानी प्रक्रिया नहीं है जिसमें ऊपर से नीचे की ओर प्रवाह होता है, जो जानते हैं उनसे, उनकी ओर जो नहीं जानते हैं। हमारा प्रस्ताव है, कि ज्ञान हमारे इतिहास में, हमारी यादों में, हमारे शरीर में वास करता है। अपने जेंडर, कामनाओं/ इच्छाओं और अपनी दुनिया का हम जो मतलब या फिर मूल निकालते हैं या देते हैं उसमें ये बस्ता है। इस तरह, ये फिल्म जो भी हमें बताया और समझाया गया और जो भी निष्कर्ष या समझ हमने अपनी तरफ से बनाई, उन दोनों को साथ बुनकर एक नए तरह के ज्ञान की रचना की तरफ इशारा करती है।
आपके और हमारे बीच ज्ञान की एक नई कल्पना की बातचीत शुरू करने के लिए, हमारी तरफ से ये एक शुरुआत है। इसके निर्माण में आप भी हमारे साथ आएं।
लेखक के बारे में
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द थर्ड आई एक नारीवादी थिंक टैंक है जो लिंग, सेक्शुआलिटी, हिंसा, तकनीक और शिक्षा के मुद्दों पर काम करता है। यह भारत के ग्रामीण, अर्ध-शहरी और शहरी इलाकों में शिक्षकों, जमीनी कार्यकर्ताओं, नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और समुदायों को सीखने हेतु एक नारीवादी मंच तैयार करने के लिए ग्रामीण और हाशिये पर खड़े लोगों के लिए ‘निरंतर’ के तीन दशकों के ज्ञान उत्पादन को डिजिटल क्षेत्र में लेकर जाने का काम करता है।
