सरकार के साथ जुड़ने के कुछ कारगर उपाय – भाग 2
इस वीडियो के पिछले भाग में हमने सरकार से जुड़ने की बुनियादी बातों पर चर्चा की थी। अगर आपने वह भाग नहीं देखा है, तो पहले उसे जरूर देखें। वीडियो के इस भाग में हम बात कर रहे हैं, अगले कदम की— यानी, अधिकारियों से प्रभावी संवाद और बेहतर संबंध कैसे स्थापित करें।
इसके अलावा हम जानेंगे कि सरकारी दफ्तरों में दस्तावेजों की क्या भूमिका होती है? किस तरह से बातचीत को स्पष्ट, उद्देश्यपूर्ण और पेशेवर बनाया जाए? निचले स्तर के अधिकारियों की भूमिका क्यों अहम है? ऐसे ही कुछ कारगर सुझाव आपको इस वीडियो में मिलेंगे।
ध्यान रखें कि सरकारी अधिकारी बहुत व्यस्त होते हैं। इसलिए अपनी बातचीत में यह स्पष्ट रूप से बताना बहुत जरूरी है कि आप क्या करना चाहते हैं, क्यों करना चाहते हैं और उससे सरकार को क्या लाभ होगा। आपकी प्रस्तुति जितनी साफ और उद्देश्यपरक होगी, संवाद उतना ही प्रभावी होगा।
कभी-कभी यह भी संभव है कि पूरी तैयारी के बावजूद भी आपको अनुमति न मिले। इसके कई कारण हो सकते हैं, जिस पर हमने इस वीडियो मे विस्तार से बात की है। यह जरूरी नहीं कि ये सभी सुझाव हर स्थिति में काम करें। लेकिन यदि आपकी तैयारी मजबूत हो, तो इससे न केवल सरकार से अनुमति मिलने की संभावना बढ़ती है, बल्कि अधिकारियों के साथ आपके रिश्ते भी स्थायी और भरोसेमंद बनते हैं।
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यह वीडियो मयंक लोधा के अनुभवों पर आधारित है। मयंक एक सोशल इम्पैक्ट पेशेवर हैं, जिन्हें व्यवसायिक, सरकारी और गैर-लाभकारी क्षेत्रों में काम करने का लंबा अनुभव है।
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लेखक के बारे में
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मयंक लोधा एक अनुभवी सोशल इम्पैक्ट पेशेवर हैं जिन्हें व्यवसायिक, सरकारी और गैर-लाभकारी क्षेत्रों में काम करने का अनुभव है। वर्तमान में, वे फिलैंथ्रॉपी, सामाजिक उद्यमिता और शासन के साझे मुद्दों पर काम करते हैं। इसका उद्देश्य सरकार, बाजार और समाज को एक साथ लाना है ताकि सरकारी तंत्र की मदद से नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो सके। इससे पहले, उन्होंने एक राज्य सरकार के हिस्से के तौर पर, सरकार के अंदर और बाहर, विभिन्न हितधारकों के बीच संस्थागत सहयोग से संबंधित भी काम किया है।
