नेतृत्व और हुनर
-
समाजसेवी संस्थाएं अपनी विफलताओं पर बात क्यों नहीं करती हैं?
कुछ वास्तविक तो कुछ काल्पनिक जोखिम, समाजसेवी संस्थाओं को उनकी असफलता पर बात करने से रोकते हैं लेकिन अगर संस्थाएं और फंडर्स चाहें तो इस पर सहज संवाद हो सकता है। -
क्यों सामाजिक संस्थाओं को लोकल और ग्लोबल स्तर पर साथ काम करना चाहिए
आने वाले समय में सामाजिक संस्थाओं की प्रासंगिकता इस बात से भी तय होगी कि छोटे स्तर पर किए जा रहे उनके प्रयास वैश्विक तस्वीर का हिस्सा किस तरह से बन रहे हैं। -
बंकर रॉय: ‘साधारण से समाधान को लागू करना सबसे अधिक कठिन होता है’
बेयरफुट कॉलेज के संस्थापक बंकर रॉय से उनकी यात्रा में आने वाली चुनौतियों और उनसे मिलने वाले अनुभवों और सीख पर, पत्रकार रजनी बख्शी से हुई बातचीत। -
संगठनात्मक संस्कृति प्रतिभावान कर्मचारियों को रोकने में कैसे मददगार है?
आईएसडीएम और अशोका यूनिवर्सिटी के सीएसआईपी का यह अध्ययन बताता है कि जन-केंद्रित संस्कृति और काम के लिए सहयोगी वातावरण मुहैया करवाने वाले संगठन प्रतिभाओं को हासिल करने और रोके रखने में सफल होते हैं। -
समाजसेवी संस्थाओं में नेतृत्व परिवर्तन के दौरान क्या ग़लतियां हो सकती हैं?
आईडीआर से बातचीत में सफीना हुसैन और महर्षि वैष्णव ‘एजुकेट गर्ल्स’ में नेतृत्व परिवर्तन (लीडरशिप ट्रांज़िशन) से जुड़े अपने अनुभव साझा कर रहे हैं और कुछ कारगर सुझाव भी दे रहे हैं। -
समाजसेवी संस्थाओं में नेतृत्व बदलने की प्रक्रिया क्या और कैसी होनी चाहिए?
सहज नेतृत्व परिवर्तन एक संभव लेकिन कठिन काम है, संगठनात्मक परिवर्तन की प्रक्रिया से जुड़े कुछ सुझाव यहां दिए जा रहे हैं जो इसे सरल बनाते हैं। -
सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को समझना
सरकारी योजनाएं और समाजसेवी स्वास्थ्य हस्तक्षेप काफ़ी हद तक फ़्रंटलाइन कार्यकर्ताओं पर निर्भर हैं। यह लेख उन स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को प्रेरित करने वाले कारकों, उनके सामने आने वाली चुनौतियों और उन्हें दूर करने के तरीक़ों के बारे में बता रहा है। -
जन-केंद्रित संगठन बनने के नौ तरीके
आंतरिक प्रतिभा प्रबंधन, निरंतर सीखने और सुधार की एक प्रक्रिया है। यह लेख आपको एक जन-केंद्रित संगठनात्मक संस्कृति के निर्माण से जुड़े कुछ सुझाव देता है। -
फ्रंटलाइन कार्यकर्ता भारत के ग्राम्य विकास को दुनिया के लिए एक उदाहरण बना सकते हैं
ग्रामीण युवा एक अनमोल संसाधन हैं जिन्हें जल और कृषि के क्षेत्रों में फ्रंटलाइन कार्यकर्ता के तौर पर शामिल करना गांवों के तेज विकास में मददगार हो सकता है। -
लक्ष्य से ज़्यादा प्रतिभाओं को प्राथमिकता दें
गूंज के उदाहरण से समझिए कि एनजीओ का अपने नैतिक मूल्यों के प्रति ईमानदार रहना और अपनी टीम को महत्व देना संगठनात्मक विकास के लिए कितना जरूरी है। -
हमें फील्ड कार्यकर्ताओं के कौशल विकास को प्राथमिकता देने की जरूरत क्यों है
फील्ड में काम करने वाले हमारे कार्यकर्ताओं के कौशल और डिजिटल साक्षरता को बेहतर बनाना उनके लिए, संगठन के लिए और व्यापक स्तर पर सामाजिक क्षेत्र के लिए उपयोगी है। -
विकलांगता के अनुकूल कार्यस्थल का निर्माण: समावेशिता क्यों मायने रखती है
एक समावेशी नेतृत्वकर्ता ‘हम लोग बनाम वे लोग’ के कथन को केंद्र में रखकर काम नहीं करता है। उन्हें कार्यस्थल में अपने और उन लोगों के बीच मौजूद समानताओं पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए जिनसे उनका संवाद स्थापित होता है।