जैस्मीन बल
जैस्मीन बल आईडीआर में एक संपादकीय विश्लेषक हैं, जहां वह कंटेंट राइटिंग और संपादन से जुड़े काम करती हैं। इससे पहले इन्होंने वीवा बुक्स में एक संपादक के रूप में और सोफिया विश्वविद्यालय, जापान में एफएलए राइटिंग सेंटर में एक ट्यूटर के रूप में काम किया है। जैस्मीन ने वैश्विक अध्ययन और अंग्रेजी में एमए और सामाजिक विज्ञान में बीए किया है।
जैस्मीन बल के लेख
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हल्का-फुल्का वर्क-फ्रॉम-होम के लिए कोई वजह चाहिए क्या?
पेश हैं घर से काम करने की सात अजीबोगरीब वजहें, जो शत-प्रतिशत सच हैं। -
तकनीक व्हाट्सएप चैटबॉट्स: सामाजिक संस्थाओं के कहां काम आ सकते हैं और कहां नहीं?
सेक्टर के दो अनुभवी लीडर्स से जानिए कि सामाजिक संस्थाएं व्हाट्सएप चैटबॉट्स का कैसे और कितना इस्तेमाल कर सकती है। -
हल्का-फुल्का आपकी फंडरेजिंग पिच के लिए नवजोत सिंह सिद्धू की कमेंट्री
क्योंकि हर फंडर मीटिंग, विश्व कप फाइनल जैसी महसूस होती है। -
सरकार और समर्थन ग्रामीण राजस्थान को मनरेगा की ज़रूरत क्यों है?
श्रमिक, यूनियन और नागरिक संगठन बता रहे हैं कि सीमित बजट, कम मज़दूरी और भ्रष्टाचार के बाद भी मनरेगा स्थानीय विकास और महिला सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका कैसे निभाता है। -
सामाजिक न्याय आंकड़े मुस्लिम महिला श्रमिकों के बारे में क्या नहीं बताते हैं?
महामारी ने जहां एक तरफ़ मध्य और उच्च वर्ग की मुस्लिम महिलाओं के लिए नौकरी पाना आसान बना दिया है, वहीं दूसरी ओर निम्न-आय वाले परिवारों और प्रवासियों को इसके लिए काफी संघर्ष करना पड़ रहा है। -
नेतृत्व और हुनर समाजसेवी संस्थाओं में नेतृत्व परिवर्तन के दौरान क्या ग़लतियां हो सकती हैं?
आईडीआर से बातचीत में सफीना हुसैन और महर्षि वैष्णव ‘एजुकेट गर्ल्स’ में नेतृत्व परिवर्तन (लीडरशिप ट्रांज़िशन) से जुड़े अपने अनुभव साझा कर रहे हैं और कुछ कारगर सुझाव भी दे रहे हैं।





