कुमारी रोहिणी
कुमारी रोहिणी इंडिया वॉटर पोर्टल की संपादकीय टीम का हिस्सा हैं। इससे पहले वे आईडीआर हिन्दी में संपादकीय सलाहकार रह चुकी हैं। वे पेंगुइन रैंडम हाउस और रॉयल कॉलिन्स जैसे प्रकाशकों के लिए एक फ़्रीलांसर अनुवादक के रूप में काम करती हैं और साथ ही मिशेल ओबामा की बिकमिंग सहित विभिन्न पुस्तकों का अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद किया है। इसके अलावा उन्होंने दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया में कोरियाई भाषा एवं साहित्य का अध्यापन किया है। रोहिणी ने दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से कोरियाई भाषा एवं साहित्य में एमए और पीएचडी किया है और इस क्षेत्र में पीएचडी करने वाली वे भारत की पहली शोधार्थी हैं।
कुमारी रोहिणी के लेख
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अधिकार यमुना खादर में बसे लोगों के जीवन और आजीविका पर कितनी तरह के खतरे हैं?
यमुना खादर में बसने और काम करने वाले प्रवासी श्रमिकों का जीवन कभी बाढ़, कभी जमीन मालिक तो कभी विकास परियोजनाओं के चलते संकट में दिखता है। -
हल्का-फुल्का यह आपकी अंतरात्मा की आवाज़ है… शायद?
आमतौर पर विकास सेक्टर में काम करने वाले विपरीत परिस्थितियों में भी सकारात्मक बने रहते हैं, लेकिन ऐसे में उनकी अंतरात्मा क्या कहती है, यहां जानिए। -
हल्का-फुल्का ‘एक मैनेजर अपनी टीम को क्या-क्या नहीं दे सकता पर उसे चाहिए, बस छुट्टी!’
यह मैनेजर की डायरी पूरी तरह से काल्पनिक है और विकास सेक्टर में काम करने वाले उन तमाम मैनेजर्स को समर्पित है जो चाहे-अनचाहे अपनी टीम के सदस्यों की छुट्टियां मंज़ूर कर ही देते हैं। -
अधिकार कोयला-निर्भर समुदायों को नौकरी से ज़्यादा ज़मीन की चिंता क्यों है?
छत्तीसगढ़ और झारखंड के कोयला-निर्भर क्षेत्रों में जस्ट ट्रांज़िशन की प्रक्रिया के मुख्य केंद्र में स्थानीय लोगों को जमीन वापस देने का विचार क्यों होना चाहिए।



