रजिका सेठ
रजिका सेठ आईडीआर हिंदी की प्रमुख हैं, जहां वह रणनीति, संपादकीय निर्देशन और विकास का नेतृत्व सम्भालती हैं। राजिका के पास शासन, युवा विकास, शिक्षा, नागरिक-राज्य जुड़ाव और लिंग जैसे क्षेत्रों में काम करने का 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने रणनीति प्रशिक्षण और सुविधा, कार्यक्रम डिजाइन और अनुसंधान के क्षेत्रों में टीमों का प्रबंधन और नेतृत्व किया। इससे पहले, रजिका, अकाउंटेबिलिटी इनिशिएटिव, सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च में क्षमता निर्माण कार्य का निर्माण और नेतृत्व कर चुकी हैं। रजिका ने टीच फॉर इंडिया, नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी और सीआरईए के साथ भी काम किया है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में बीए और आईडीएस, ससेक्स यूनिवर्सिटी से डेवलपमेंट स्टडीज़ में एमए किया है।
रजिका सेठ के लेख
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अधिकार आईडीआर इंटरव्यूज | शंकर सिंह (भाग-दो)
देश में आरटीआई आंदोलन के लीडर और एमकेएसएस के स्थापकों में से एक, सामाजिक कार्यकर्ता शंकर सिंह आईडीआर से बातचीत में अपने कामकाजी और निजी जीवन के बारे में बात कर रहे हैं। -
अधिकार आईडीआर इंटरव्यूज | शंकर सिंह (भाग-एक)
देश में आरटीआई आंदोलन के लीडर और एमकेएसएस के स्थापकों में से एक, सामाजिक कार्यकर्ता शंकर सिंह आईडीआर से बातचीत में अपने कामकाजी और निजी जीवन के बारे में बात कर रहे हैं। -
हल्का-फुल्का क्या आपका जामनगर से आई इन तस्वीरों से कोई वास्ता है… देखिए, शायद हो?
न तो जामनगर का मेहमान होना आसान बात है और ना ही सोशल सेक्टर में काम करना। -
हल्का-फुल्का समाजसेवी संस्थाएं और उनके दबे-छिपे कामकाजी मूल्य
हर रोज़ काम (ना) आने वाले समाजसेवी संस्थाओं के कामकाजी मूल्य। -
हल्का-फुल्का बजट के बादल, हम पर जाने कब बरसेंगे?
विकास सेक्टर को भी बजट से उम्मीद थी कि वो बरसे तो कुछ बात आगे बढ़े। -
हल्का-फुल्का जब पीनी पड़े चाय पे चाय, फिर भी काम ना हो पाए!
सरकारी दफ़्तर और ग़ैर-सरकारी संगठनों से जुड़े लोग, और वे नज़ारे जो चाहे-अनचाहे अक्सर ही दिख जाते हैं। -
फंडरेजिंग और संवाद एफसीआरए लाइसेंस रद्द होने का सबसे ज्यादा नुकसान किसे होगा?
समाजसेवी संस्थाओं के एफसीआरए लाइसेंस रद्द होने का असर बढ़ी हुई बेरोज़गारी, हताश समुदाय और कमजोर लोकतंत्र के रूप में दिख सकता है।





