सलोनी सिसोदिया
सलोनी सिसोदिया आईडीआर में मल्टीमीडिया एनालिस्ट हैं। इससे पहले उन्होंने फेमिनिज़म इन इंडिया के साथ सीनियर डिजिटल एडिटर के रूप में भी काम किया है तथा जेंडर, कल्चर, समाज और सिनेमा जैसे विषयों पर मुख्य तौर पर अनुभव रखती हैं। सलोनी ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में अपनी पढ़ाई की है। वह फोटो निबंध, फोटोग्राफी और ट्रेवल करने में ख़ास रूचि रखती हैं।
सलोनी सिसोदिया के लेख
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हल्का-फुल्का इम्पैक्ट, उम्मीद और एक प्लेलिस्टः नये साल में बस काम चलता रहे
कभी फील्ड की थकान, कभी अंतहीन मीटिंग्स और कभी फाइलों का बोझ; ऐसे में संगीत ही है जो साथ चलता है। नए साल में ये धुनें हमें याद दिलाती हैं कि बदलाव की राह लंबी सही, लेकिन हर छोटा कदम मायने रखता है। -
हल्का-फुल्का फंडर को क्या चाहिए? बस हमारा सुकून!
जीवन और उसकी अनंत चुनौतियों से आगे बस एक चीज है! फंडर्स की मांगें…कुछ ऐसी ही बात कहता एक जमीनी किस्सा। -
हल्का-फुल्का नहीं सहेंगी, नहीं सहेंगी…सेक्टर की बिल्लियां नहीं सहेंगी
वर्ल्ड कैट डे पर पढ़िए थकान और बर्नआउट झेलती, चिढ़चिढ़ी और ट्रीट को तरसती सोशल सेक्टर बिल्लियों की पर्सनल म्याऊं डायरी। -
हल्का-फुल्का ग्रामीण स्वास्थ्य की हकीकत: ‘ग्राम चिकित्सालय’ के माध्यम से!
जब डॉक्टर बीमारी के लक्षण गूगल करे या बीपी मशीन में छेद हो—तो समझिए, यही है हमारी ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था! -
हल्का-फुल्का सरकारी योजना 404: लाभ नॉट फाउंड
सरकारी योजनाएं सबके लिए हैं, बस धैर्य आपका मजबूत हो और उम्र लंबी। -
तकनीक विकास सेक्टर में अपना डिजिटल फुटप्रिंट कैसे तैयार करें?
डिजिटल एक्टिविज़म में सोशल मीडिया हैशटैग कैंपेन, ऑनलाइन याचिकाएं, क्राउडफंडिंग और कंटेंट क्रिएशन जैसे उपाय तरीके शामिल हैं। -
हल्का-फुल्का एनजीओ वालों से ना पूछो: इस पेशे में कितना पैसा, कैसा पैसा?
समाज को बदलने के बुलंद इरादों लेकिन उतनी ही कम सैलरी के चलते एनजीओ वर्कर को समाज और परिवार जिस तरह से देखता है, उसमें जमीन-आसमान का फर्क दिखता है। -
हल्का-फुल्का गणतंत्र दिवस पर दिल में देशभक्ति के अलावा और कौन-कौन से भाव आते हैं?
गणतंत्र दिवस पर स्कूल के बच्चों से लेकर शिक्षक, सरपंच और बाकी तमाम लोगों की चिंताओं की वजहें एक-दूसरे से एकदम अलग होती हैं। -
हल्का-फुल्का नया साल, नया संकल्प! लेकिन दफ्तर वही पुराना?
सभी की तरह सामाजिक क्षेत्र के कर्मचारी भी नए साल में बड़े संकल्प लेते हैं। यहां कुछ ऐसे ही मजेदार संकल्पों का ज़िक्र है जिन्हे वे कभी नहीं निभा पाएंगे! -
पर्यावरण देश में शीत लहरों की संख्या क्यों बढ़ रही है?
शोध बताते हैं, जलवायु परिवर्तन के कारण भारत में साल 1982 से 2020 के बीच शीत लहरों की संख्या पांच गुना बढ़ गई है और इससे सबसे अधिक प्रभावित उत्तर भारतीय राज्य होते हैं। -
हल्का-फुल्का ऑफिस का लंच ब्रेक = 10% खाना + 90% गप्पें!
कहते हैं हर लंच ब्रेक में एक ना एक राज जरूर निकलता है, वो भी टिफिन से नहीं बल्कि किसी के मुंह से! -
हल्का-फुल्का पोषण माह में एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के अनुभव
पोषण माह के दौरान गुल्लक सीरीज़ के बहाने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की काल्पनिक प्रतिक्रियाएं।











