सृष्टि गुप्ता
सृष्टि गुप्ता आईडीआर में एडिटोरियल एसोसिएट हैं और लेखन, सम्पादन और अनुवाद से जुड़े काम करती हैं। इससे पहले सृष्टि ने स्प्रिंगर नेचर के साथ संपादकीय काम किया है। उन्होंने राजनीति विज्ञान में एम ए किया है और लिंग, सामाजिक न्याय, सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर अध्य्यन करने में रुचि रखती हैं।
सृष्टि गुप्ता के लेख
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विविधता और समावेश सोशल सेक्टर कॉन्फ्रेंस: समान मंच की असमान सच्चाई
भारत में विकास सेक्टर के सम्मेलन अक्सर भाषा, विविधता और समावेशन की कसौटी पर खरे नहीं उतरते हैं। क्या यह सच में एक समान मंच हैं? -
पर्यावरण जलवायु संकट से सुरक्षित भविष्य बनाने में समुदाय क्या भूमिका निभा सकते हैं?
जलवायु प्रयासों में अक्सर स्थानीय समुदायों और साझा संसाधनों की भूमिका अनदेखी रह जाती है जबकि इन्हें शामिल करना सामाजिक और न्यायिक नजरिए से जरूरी लगने लगा है। -
हल्का-फुल्का कॉन्वेंट में पढ़कर भी तुम्हें सोशल सेक्टर में काम करना है, क्यों?
ऐसे ही कुछ सवाल और प्रतिक्रियाएं जो मेरा परिवार मेरी विकास सेक्टर की नौकरी पर करता रहता है। -
पर्यावरण क्या स्थानीय मोबाइल रिपेयर की दुकानें ई-कचरे को कम करने में मदद कर सकती हैं?
कंप्यूटर और मोबाइल रिपेयर की दुकानों लंबे समय से उपकरणों के जीवनकाल को बढ़ाने में मदद कर रही हैं। लेकिन उन्हें जीवित रहने के लिए समर्थन की ज़रूरत है। -
हल्का-फुल्का शायर कार्यकर्ता का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू
शायर कार्यकर्ता से आईडीआर की काल्पनिक बातचीत, जिसका वास्तविक घटनाओं से भरपूर मेल है। -
विविधता और समावेश विकलांग जन के लिए प्रोग्राम बनाते समय क्या ध्यान में रखना चाहिए?
विकलांग-जनों के लिए कार्यक्रम डिजाइन करते हुए समुदाय की जरूरतों को पहचानना और उनके अनुसार काम करना, प्रभावी नतीजे देने वाला हो सकता है। -
हल्का-फुल्का चुटकी: हमारी (और आपकी) लीडरशिप पर
मेरी मैनेजर पिछले दिनों एक लीडरशिप रिट्रीट पर थी और उस दौरान मैंने जितना भी काम किया, उसका हासिल यह लेख है। -
प्रोग्राम सामाजिक बदलाव लाने में युवाओं की रुचि कैसे जगाएं?
यह अब तथ्य है कि युवा उन्हीं कार्यक्रमों में रुचि लेते हैं जो उन्हें सशक्त बनाने के साथ-साथ उनकी समस्याओं को हल और आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। -
स्वास्थ्य और पोषण आईडीआर इंटरव्यूज | डॉ. नरेंद्र गुप्ता
एक्टिविस्ट और स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र गुप्ता बताते हैं कि भारत में स्वास्थ्य के प्रति नज़रिया बदलना क्यों ज़रूरी है और राइट टू हेल्थ अधिनियम और जनस्वास्थ्य अभियान को बढ़ावा देना कितना अहम है। -
तकनीक ज़मीनी कार्यकर्ता तकनीक का इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं?
डेटा इकठ्ठा करने के लिए तकनीक को अपनाना ज़मीनी कार्यकर्ताओं के लिए उनके काम की योजना बनाने और रिपोर्ट बनाने में फायदेमंद है। -
हल्का-फुल्का आपकी फंडरेजिंग पिच के लिए नवजोत सिंह सिद्धू की कमेंट्री
क्योंकि हर फंडर मीटिंग, विश्व कप फाइनल जैसी महसूस होती है। -
हल्का-फुल्का रिपोर्ट लिखने के दौरान आने वाली कठिनाइयां
पंचायत सीरीज के नज़रिए से जानिए कि ज़मीनी कार्यकर्ताओं को किस तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, जब रिपोर्ट लिखने की बात आती है।











