क्या विकास सेक्टर में वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के अनुभव की कोई जगह है?

मेरा नाम उदयसिंह मकवाना है। मैं साबरकांठा जिले के हिम्मतनगर के प्रेमपुर गांव में रहता हूं। मेरी उम्र 52 वर्ष है और आजकल मैं काम की तलाश कर रहा हूं। मेरे कई साथी जो पहले सामाजिक क्षेत्र में काम करते थे, अब सलाह देते हैं कि मुझे किसी और क्षेत्र में काम करने के बारे में सोचना चाहिए।
मैंने 22 वर्ष की उम्र में सामाजिक क्षेत्र में काम की शुरुआत की थी। उस समय मैंने ‘दिशा’ नाम की संस्था में फील्ड वर्कर के रूप में अपना करियर शुरू किया था। आगे चलकर मैं संस्था द्वारा संचालित गुजरात खेत कामदार यूनियन (जीएएलयू) में बतौर सचिव नियुक्त हुआ। जब मैंने सचिव का पद संभाला, तब यूनियन की सदस्य संख्या लगभग 585 थी। फिर लगभग 18 साल के लंबे सफर के बाद फंडिंग की कमी के चलते काम बंद हो गया। जब मुझे कार्य-मुक्त किया गया, तब यूनियन की संख्या बढ़कर 59,400 हो चुकी थी और इसकी अपनी एक अलग पहचान बन चुकी थी।
तकरीबन 40 वर्ष की उम्र में मैंने फिर से काम ढूंढना शुरू किया। इस दौरान मैंने संवेदना ट्रस्ट के साथ एक साल तक आदिवासी, मजदूर और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर काम किया। इसके अलावा मैंने पाथेय संस्था, जो पंचायतों के साथ काम करती है, में बजट निर्माण और पंचायत स्तर की योजना प्रक्रियाओं में सहयोग दिया। मैंने अहमदाबाद के सॉलिडैरिटी सेंटर में असंगठित मजदूरों के साथ न्यूनतम मजदूरी, आरटीआई और विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाने का काम भी किया। इन छोटे-छोटे प्रोजेक्ट के बाद, वर्ष 2016 में मुझे राजस्थान की ‘लोकतंत्र शाला’ से तीन साल की फेलोशिप मिली, जिसके दौरान मैंने कृषि और मनरेगा मजदूरों के साथ काम किया। फेलोशिप पूरी होने के बाद, जून 2019 में मैंने चाइल्डलाइन 1098 में कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया। जुलाई 2023 में चाइल्डलाइन भी बंद हो गई क्योंकि केंद्र सरकार ने यह प्रोजेक्ट समाप्त कर दिया।
आज 52 वर्ष की उम्र में मैं एक बार फिर सामाजिक क्षेत्र में काम ढूंढने के लिए प्रयास कर रहा हूं।
पूरा जीवन इस क्षेत्र में काम करने और उसी में रुचि होने के कारण मैंने कुछ जानी-मानी सामाजिक संस्थाओं से संपर्क किया। उनकी ओर से जवाब तो सकारात्मक मिला, लेकिन आखिर में यही कहा गया कि “अगर आपके लायक कोई काम होगा तो जरूर बताएंगे।”
एक संस्था, जो पानी और जैविक खेती पर काम करती है, ने कहा कि गुजरात में उनके काम में अब फंड कम हो गया है। इसलिए वे नए कार्यकर्ताओं को रखने में सक्षम नहीं हैं। वहीं आदिवासी किसानों के साथ काम करने वाली एक संस्था ने कहा कि प्रोजेक्ट के अभाव के चलते उनके पास कोई काम नहीं है। सरकारी प्रोजेक्ट से जुड़ी हुई कई संस्थाओं ने साफ कहा कि “आपकी उम्र ज्यादा है। हम तो युवा कार्यकर्ताओं को ही रखते हैं।”
तमाम संस्थाओं से बातचीत की प्रक्रिया में मुझे यह एहसास हुआ कि हर संस्था के भीतर कई तरह की रणनीतियां होती हैं। मसलन कितनी उम्र के कार्यकर्ता रखने हैं, कितने समय तक उन्हें प्रोजेक्ट पर रखना है, और किस सामाजिक पृष्ठभूमि से फील्ड कार्यकर्ता चुनना है। लेकिन इन रणनीतियों में शायद अमूमन अनुभव के लिए जगह बना पाना मुश्किल होता है।
जैसा कि मैंने पहले कहा, अब लोग मुझे किसी और क्षेत्र में काम करने की सलाह देते हैं। लेकिन मैंने 22 साल की उम्र में पूरे मन से सामाजिक क्षेत्र में काम शुरू किया था। आज मेरे लिए 52 साल की उम्र में किसी नए क्षेत्र में शुरुआत करना बहुत कठिन है। मुझे लगता है कि मैं किसी अन्य क्षेत्र के साथ न तो न्याय कर पाऊंगा और न ही उसमें मुझे आत्म-संतोष मिलेगा। इसलिए मेरी चुनौती और खोज, दोनों अभी जारी हैं।
सामाजिक क्षेत्र में एक पेशेवर के रूप में तकरीबन तीन दशक काम करने के बाद मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या सेक्टर में काम करने वाली छोटी-बड़ी संस्थाएं जमीनी कार्यकर्ताओं के भविष्य के लिए भी कोई कदम उठा रही हैं?
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लेखक के बारे में
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उदयसिंह मकवाना सामाजिक सेक्टर के एक कार्यकर्ता हैं। वह गुजरात के साबरकांठा जिले की हिम्मतनगर तहसील से कुछ दूरी पर स्थित प्रेमपुर गांव में रहते हैं। गांव से ही अपनी स्कूली तालीम हासिल करने के बाद उन्होंने हिम्मतनगर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा पूरी की। बी.एड की डिग्री हासिल करने के बाद उदयसिंह ने सामाजिक सेक्टर में काम करने की शुरुआत की थी।