
हल्का-फुल्का
क्या आपका जामनगर से आई इन तस्वीरों से कोई वास्ता है… देखिए, शायद हो?
न तो जामनगर का मेहमान होना आसान बात है और ना ही सोशल सेक्टर में काम करना।जब कहने वाले हों हजार, तब चाहिए मन की शक्ति अपार
युवाओं को जब अपना करियर चुनना होता है तो कई बार उनसे ज़्यादा समाज की चलती है।कभी-कभी हेड ऑफिस से आने वाले फील्ड टीम की ‘मदद’ कैसे करते हैं?
कुछ स्थितियां जब हेड ऑफिस से आने वालों को ज़मीनी कार्यकर्ताओं की मदद की ज़रूरत होती है।समाजसेवी संस्थाएं और उनके दबे-छिपे कामकाजी मूल्य
हर रोज़ काम (ना) आने वाले समाजसेवी संस्थाओं के कामकाजी मूल्य।जिनसे हमें प्रेरणा मिलती है, उन किसानों को क्या मिलता है?
किसानों और मेहनतकशों को लेकर मीडिया की नज़र।पर्यावरण संरक्षण के ईमानदार प्रयास?
कॉर्पोरेट कंपनियों की सी एस आर नीतियों में पर्यावरण की चिंता।बजट के बादल, हम पर जाने कब बरसेंगे?
विकास सेक्टर को भी बजट से उम्मीद थी कि वो बरसे तो कुछ बात आगे बढ़े।सुनने में अच्छा लगा लेकिन समझ कुछ नहीं आया!
विकास सेक्टर के भारी-भरकम शब्दों (जॉर्गन) के साथ ज़मीनी कार्यकर्ताओं के अनुभव।विकास सेक्टर का सालाना राशिफल: भाग 2
अगर इस राशिफल में बताई गई कोई भी बात साल 2024 में आपके लिए सच साबित होती है, उसे केवल एक अनचाहा संयोग माना जाएगा।विकास सेक्टर का सालाना राशिफल: भाग 1
अगर इस राशिफल में बताई गई कोई भी बात साल 2024 में आपके लिए सच साबित होती है, उसे केवल एक अनचाहा संयोग माना जाएगा।‘इम्पैक्ट पर जोर नहीं, कैसे दिखाएं डेटा ग़ालिब’
चचा ग़ालिब से माफ़ी समेत, उनकी शायरी से समझिए डेवलपमेंट सेक्टर के कुछ शब्द।एनजीओ में काम करने वालों का… दरद ना जाने कोय
विकास सेक्टर में काम करने वालों को लेकर परिवार, समाज और बाक़ी लोगों की सोच और उनके सच में कितना अंतर होता है।











