सेक्टर से
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यमुना खादर में बसे लोगों के जीवन और आजीविका पर कितनी तरह के खतरे हैं?
यमुना खादर में बसने और काम करने वाले प्रवासी श्रमिकों का जीवन कभी बाढ़, कभी जमीन मालिक तो कभी विकास परियोजनाओं के चलते संकट में दिखता है। -
जलवायु परिवर्तन फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं के जीवन को कैसे प्रभावित करता है?
विकास सेक्टर के जमीनी कार्यकर्ता जलवायु परिवर्तन के असर से अछूते नहीं हैं, यह जीवन के साथ-साथ उनके काम की निरंतरता और प्रभावशीलता को भी बुरी तरह प्रभावित करता है। -
सूचना के अधिकार का बेहतर इस्तेमाल कैसे करें?
आरटीआई अधिनियम का इस्तेमाल अक्सर राज्य स्तर के पोर्टल की सुगमता पर निर्भर होता है। प्रस्तुत हैं आरटीआई दाखिल करने के कुछ प्रभावी सुझाव, जिनसे व्यापक बदलावों की राह प्रशस्त हो सकती है। -
संघर्ष से परे: कश्मीर के दर्द और जीवटता की कहानी
कश्मीर में दशकों से अशांति और हिंसा ने एक गहरी मानसिक वेदना को जन्म दिया है। कश्मीरी आवाम इससे कैसे जूझती है और इस दिशा में कौन से कदम उठाये जाने चाहिए? -
तीरे-तीरे नदिया: हर साल बाढ़ में डूबता भारत
प्राकृतिक असंतुलन और मानवीय हस्तक्षेप ने मिलकर भारत में बाढ़ के जोखिम को लगातार गहरा किया है। यह वार्षिक आपदा अब सामाजिक-आर्थिक क्षति का प्रमुख स्रोत बन चुकी है। -
फोटो निबंध: क्यों लुप्त होने की कगार पर हैं असम की खूटियां?
कभी असम के नदी द्वीपों में अर्ध-घुमंतू पशुपालकों की ठौर रही खूटियां आज अपना अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष कर रही हैं। -
स्टेम शिक्षा में लैंगिक समानता: चुनौतियां और संभावनाएं
स्टेम शिक्षा के क्षेत्र में लैंगिक असमानता के बहुत से परस्पर कारण हैं। लेकिन स्कूली शिक्षा में ही छात्राओं को उचित अवसर और सहयोग देकर इस अंतर को कम किया जा सकता है। -
कन्नौज: जलवायु संकट से घिरी इत्र नगरी
बढ़ते तापमान के चलते कन्नौज में फूलों का उत्पादन कम हो गया है जो यहां के इत्र व्यापार और उससे मिलने वाले रोजगार को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। -
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