सेक्टर से
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ओडिशा की एक शिल्पकार ने गढ़ी अपनी ही कहानी
ओड़िशा की एक शिल्पकार जो अपनी कहानी बता रही है कि कैसे उसने महिला शिल्पकारों के साथ मिलकर अपनी एक विश्वसनीय पहचान बनाई और समुदाय विकसित किया। -
“दिन समय पर शुरू तो होता है लेकिन समय पर ख़त्म नहीं होता”
हॉस्पिटैलिटी कार्यकर्ता के जीवन का एक दिन जो कोविड-19 के दौरान एक रिसॉर्ट चलाती हैं और सहयोगियों की अपनी टीम को सम्भालने का काम करती हैं। -
एक फ़ार्मर प्रोड़्यूसर कम्पनी कैसे चलाते है?
एक आदिवासी महिला हाशिए पर जी रहे किसानों की आय में सुधार लाने के लिए उन्हें एकत्रित करने वाली एक किसान उत्पादक कम्पनी (फ़ार्मर प्रोड़्यूसर कम्पनी या एफ़पीसी) का प्रबंधन करती है जिनकी मालिक महिलाएँ हैं। -
कौशल निर्माण: उपस्थिति से आगे की भागीदारी
अपने कार्यक्रम में युवाओं की सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करने के पाँच तरीके। -
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बिहार में बाल विवाह: यह अब तक क्यों चला आ रहा है?
बिहार में हर पाँच लड़कियों में से दो से अधिक की शादी कम उम्र में हो जाती है। यहाँ राज्य में होने वाले बाल विवाहों के पीछे के कारणों के बारे में बताया गया है साथ ही इस प्रथा में कमी लाने वाले कुछ तरीकों के बारे में भी बात की गई है। -
हर एक सर्वे से बाधाओं को तोड़ना
कर्नाटक में काम करने वाली एक एन्यूमरेटर (गणनाकार) के जीवन का एक दिन जो कामकाजी महिला होने की चुनौतियों और डाटा संग्रह में अच्छे संचार के महत्व के बारे में बताती हैं। -
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विधवाओं को परिवार के जमीन में हक़ नहीं मिलता
गुजरात में किए गए एक अध्ययन से यह पता चला है कि कोविड-19 के दौरान विधवा हुई महिलाएं अपनी भूमि अधिकारों तक पहुँचने के लिए संघर्ष कर रही हैं।