सेक्टर से
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ग्रामदान की वर्तमान चुनौतियां और कानूनी उलझनें
हमारे देश में ग्रामदानी व्यवस्था पचास वर्षों से भी ज्यादा पुरानी है। लेकिन जो गांव उस दौर में ग्रामदान को स्वीकार कर चुके थे, वे अब उससे पीछे हटना चाहते हैं। -
सुंदरबन में समुदाय द्वारा शिक्षा के लिए की गई एक सुंदर पहल
सुंदरबन के एक गांव में शुरू हुआ एक निशुल्क शिक्षा और देखभाल केंद्र जिसे समुदाय ने श्रमिक वर्ग के बच्चों के लिए शुरू किया है। -
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भारत के आपदा प्रबंधन में पशुओं को भी जगह मिलनी चाहिए
भारत में आपदा प्रबंधन नीतियों में पशुओं को शामिल करना सिर्फ संवेदनशीलता का मामला नहीं, बल्कि एक बड़े तबके की आजीविका का भी सवाल है। -
फोटो निबंध: पॉपलर की कमी से जूझता कश्मीर का ‘पेंसिल गांव’
कश्मीर का ओखू गांव भारत में पेंसिल की स्लैट का सबसे बड़ा उत्पादक है। पॉपलर वृक्षों की कटाई ने लकड़ी की आपूर्ति, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था—तीनों को संकट में डाल दिया है। -
जन गण वन
यह फिल्म झारखंड में वन संरक्षण और बहाली की दिशा में की गई सामुदायिक पहल को दिखाती है। -
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भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली में वंचित समुदायों की उपेक्षा
बिहार में कारावास की हकीकत आज भी जातीय भेदभाव और ढांचागत पक्षपात से प्रभावित है, जिसे समावेशी और न्यायपूर्ण बनाने के लिए बुनियादी बदलाव की जरूरत है। -
आईडीआर इंटरव्यूज | देविका सिंह
मोबाइल क्रेचेज की सह-संस्थापक देविका सिंह, प्रवासी मजदूरों के बच्चों के साथ अपने लंबे काम के अनुभव, एक चलती-फिरती देखभाल प्रणाली (मोबाइल केयर सिस्टम) बनाने और बच्चों की देखभाल से जुड़ी नीतियों में बदलाव लाने की कहानी साझा कर रही हैं। -
गांव की इन दाईयों को मामूली समझने की भूल न करना
ग्रामीण क्षेत्रों में दाईयों का महत्त्व और उनका अमूल्य ज्ञान एक सामाजिक धरोहर है, जिसे सहेजा जाना चाहिए। -
संवेदनशील नेतृत्व: संघर्षशील परिवेश में भरोसे की नींव
राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में समुदाय के साथ जुड़ने की नींव विनम्रता, संवेदनशीलता और सुनने की क्षमता पर आधारित होनी चाहिए।