रोजगार
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किसान उत्पादक संगठनों की सफलता कैसे सुनिश्चित की जा सकती है?
किसानों की आय उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने के लिए किसान उत्पादक संगठनों (एफ़पीओ) को मार्केट-रेडी उत्पाद का मॉडल विकसित करने और विकेंद्रीकृत उत्पादन पर ज़ोर देने की ज़रूरत है। -
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ई-मित्र अपनी ज़िम्मेदारियां ठीक से निभाकर लोगों को सशक्त बना सकते हैं
राजस्थान के एक ई-मित्र कार्यकर्ता के जीवन का एक दिन कैसे बीतता है जब वह डिजिटल माध्यमों से सरकारी योजनाओं और ऑनलाइन सेवाओं की जानकारी देकर लोगों की मदद करता है। -
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पब्लिक सेक्टर बनाम प्राइवेट सेक्टर: किसकी कितनी हैप्पी दिवाली?
आप किसी भी सेक्टर में हों, इनमें से कोई न कोई मीम आप पर ज़रूर फ़िट बैठता होगा। -
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कश्मीरी जनजातियों के सामने रोज़गार या शिक्षा में से एक को चुनने की दुविधा क्यों है?
मौसमी प्रवासन, कम आय और जाति-आधारित भेदभावों के चलते गुज्जर बकरवाल और चोपन जैसी कश्मीरी जनजातियों तक शिक्षा नहीं पहुंच पा रही है। -
मनरेगा के बारे में वह सबकुछ जो आपको जानना चाहिए
मनरेगा योजना से महिला और प्रवासी मज़दूरों को क्या लाभ मिल रहे हैं और तमाम राज्यों में इसका प्रदर्शन कैसा है? -
आशा कार्यकर्ता: जब अनिवार्य हैं तो औपचारिक क्यों नहीं?
आशा कार्यकर्ता सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसके बावजूद, वे लंबे घंटों, कम वेतन और सामाजिक सुरक्षा की कमी के रूप में अनिश्चित कार्य स्थितियों का अनुभव करते हैं। -
मनरेगा में हर साल बुज़ुर्ग कार्यबल का बढ़ना अनौपचारिक क्षेत्र की ख़राब रोज़गार नीतियों का संकेत है
भारत के कार्यबल की उम्र बढ़ने के साथ अनौपचारिक क्षेत्र की नीतियों में सुधार की जरूरत भी बढ़ रही है। बुज़ुर्ग श्रमिकों को बेरोजगारी से बचाने के लिए वित्तीय सुरक्षा उपाय अपनाए जाने चाहिए। -
कोविड-19 ने साफ़ किया है कि ग्रामीण रोज़गार को बनाए रखने में मनरेगा की क्या भूमिका है
एक अध्ययन के मुताबिक़ मनरेगा ने कोविड-19 के दौरान गांवों में रोज़गार की स्थिति को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है लेकिन इसका बजट और जवाबदेही बढ़ाने की ज़रूरत है।