वन्यजीव
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फोटो निबंध: क्यों लुप्त होने की कगार पर हैं असम की खूटियां?
कभी असम के नदी द्वीपों में अर्ध-घुमंतू पशुपालकों की ठौर रही खूटियां आज अपना अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष कर रही हैं। -
सरकारी आंकड़े जंगलों के क्षेत्रफल के साथ गुणवत्ता की भी बात क्यों नहीं करते?
जंगल से जुड़े सरकारी आंकड़ों का विश्लेषण करती पर्यावरण जानकार, देबादित्यो सिन्हा और हृदयेश जोशी की एक बातचीत। -
क्या केवल प्रमाण पत्र देकर जंगलों को बचाया जा सकता है?
भारत में वन एवं लकड़ी प्रमाणपत्र योजना बहुत ही महंगी है और इससे वनोपज का उचित उत्पादन या बेहतर वन प्रबंधन भी सुनिश्चित नहीं होता है। -
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इंसान और वन्यजीवों के बीच जंगल का बंटवारा कैसे हो?
जलवायु परिवर्तन जंगली जानवरों और उनके आवास के लिए एक बड़ा ख़तरा है और यह इंसानों से उनके संघर्ष की संभावना भी बढ़ाता है।