महिला अधिकार
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आईडीआर इंटरव्यूज | राजिम केतवास
पिछले चार दशकों से श्रमिक एवं महिला अधिकारों के मुद्दों पर सक्रिय रही राजिम केतवास मध्य प्रदेश के श्रमिक आंदोलन में भागीदारी से लेकर अपने संगठन दलित आदिवासी मंच की स्थापना तक की यात्रा और अनुभवों को साझा कर रही हैं। -
पोषण और स्वास्थ्य की सरकारी नीतियों से बहुत दूर है जमीनी हकीकत
पोषण से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए ऐसा दृष्टिकोण चाहिए जो समुदाय की पोषण संबंधी जरूरतों और स्वास्थ्य सेवा आपूर्ति तंत्र की दक्षता के बीच संतुलन कायम कर सके। -
स्टूडियो और गांव के बीच: एक सामुदायिक आरजे का दिन
इस वीडियो में दिखेगा कि कैसे एक सामुदायिक आरजे स्क्रिप्ट, रिकॉर्डिंग और गांव के बीच अपने दिन को बांटती हैं। यह कहानी सामुदायिक रेडियो कार्यकर्ता के काम को समझने की कोशिश है। -
घरेलू हिंसा अधिनियम: न्याय के लिए बेहतर अमल की जरूरत
घरेलू हिंसा कानून ने कई महिलाओं को न्याय दिलाने में सहायता की है, लेकिन इसकी प्रभावशीलता आज भी चुनौतियों से घिरी हुई है। -
कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के खिलाफ लामबंद होती घरेलू कामगार महिलायें
एनसीआर में घरेलू कामगार महिलायें सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल सुनिश्चित करने के लिए सरकार और नियोक्ताओं पर ठोस कदम उठाने का दबाव बना रही हैं। -
बुंदेलखंड की चप्पल प्रथा: स्वाभिमान की कीमत पर सम्मान
बुंदेलखंड इलाके के ललितपुर जिले में आज भी चप्पल प्रथा कायम है जो दलित समुदाय खासकर, महिलाओं के लिए अपमान और असुविधा का कारण बन रहा है। -
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घुमंतू और विमुक्त जनजाति के युवाओं के लिए सामाजिक न्याय
एनटी-डीएनटी एक्टिविस्ट और अनुभूति संस्था की संस्थापक, दीपा पवार से सुनिए कि सामाजिक न्याय के व्यावहारिक प्रयास कैसे होने चाहिए। -
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लड़कियां क्या कुछ नहीं कर सकती हैं लेकिन…
स्कूल से लेकर नौकरी तक और नौकरी से लेकर चांद तक, महिलाएं हर जगह पहुंच सकती हैं लेकिन वहां से लौटने के बाद उन्हें कुछ तय काम करने ही हैं।