महिला अधिकार
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राजस्थान में आज भी महिलाओं को डायन बताने की कुप्रथा क्यों क़ायम है?
राजस्थान समेत देशभर में आज भी महिलाओं को डायन बताकर उत्पीड़ित करने की कुप्रथा है जिसकी जड़ें पितृसत्ता, मानवीय लालच और कमजोर कानूनों में दबी दिखाई देती हैं। -
भूमि अधिकारों तक महिलाओं की पहुंच मजबूत कैसे हो?
महिलाओं के भूमि अधिकारों से जुड़े हस्तक्षेप कार्यक्रमों की कमी इशारा है कि समुदाय-आधारित संगठनों को सशक्त बनाया जाना चाहिए। -
महिलाओं को भूमि अधिकार दिलाने का मतलब उन्हें सशक्त बनाना होना चाहिए
समाजसेवी संस्थाओं को महिलाओं को सबसे पहले समझाना होगा कि भूमि अधिकार उनके सम्मान से जीने का अधिकार भी है। -
पुरुषों का साथ महिलाओं के लिए भूमि अधिकार हासिल करना आसान बना सकता है
महिलाओं को भूमि अधिकार दिलाने के लिए काम कर रही समाजसेवी संस्थाओं के लिए यह स्थापित करना जरूरी है कि लड़ाई पुरुषों से नहीं, पितृसत्ता से है। -
पुरुषों से महिलाओं के साथ हिंसा न करने की मांग करना भर काफी नहीं है
लैंगिक समानता और महिलाओं के साथ हिंसा रोकने वाले कार्यक्रमों में पुरुषों के लिए संवाद की गुंजाइश बनाने की जरूरत है। -
भारत में कामकाजी महिलाएं क्या और क्यों चाहती हैं?
एफएसजी का एक अध्ययन रोज़गार के प्रति महिलाओं के नज़रिए और प्राथमिकता को दिखाता है और श्रमबल में उनकी भागीदारी में परिवार और समाज की भूमिका पर बात करता है। -
घरेलू हिंसा के ख़िलाफ़ लड़ रही एक आदिवासी महिला के जीवन का दिन
खुद घरेलू हिंसा की पीड़िता, ग्रामीण राजस्थान की एक आदिवासी महिला हिंसा का सामना करने वाली अन्य महिलाओं को न्याय और हक़ दिलाने में उनकी मदद कर रही है। -
क्या भूमि अधिकार महिलाओं के भविष्य को सुरक्षित कर सकता है?
गुजरात में पैरालीगल कर्मचारी के जीवन का एक दिन जो महिलाओं के सम्पत्ति के अधिकार के महत्व को लेकर जागरूकता फैलाती है। वह विधवाओं को ज़मीन का मालिकाना हक़ दिलवाने और ज़मीन के रिकॉर्ड पर उनका नाम दर्ज करवाने में उनकी मदद करती है।