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फ़ोटो निबंध: प्रदूषण और कचरे के ढेर में दबता हुआ हिमालय
कचरा प्रबंधन के लिए सिंगल यूज प्लास्टिक पर देश भर में लगे प्रतिबंध को लागू करने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा, विशेष रूप से हिमालयी क्षेत्र में। -
अनौपचारिक श्रमिकों के लिए सुरक्षित प्रवास की स्थायी व्यवस्था कैसे की जा सकती है
कोविड-19 महामारी के दौरान हमने देखा भारत में प्रवासी मज़दूरों की संख्या कितनी बड़ी और दशा कैसी दुर्भाग्यपूर्ण है। यह आलेख स्वयंसेवी संस्थाओं को इन असंगठित मज़दूरों को मुख्यधारा में शामिल करने से जुड़े कुछ उपाय सुझाता है। -
ग्रामीण भारत में मधुमेह का संकट क्यों गहराता जा रहा है?
ग्रामीण आंध्र प्रदेश में हुआ एक अध्ययन इशारा करता है कि इसका जवाब खान-पान की आदतों में बदलाव और किसानों का कम श्रम प्रधान फसलों की ओर झुकाव हो सकता है। -
बाल विवाहों को रोकने के लिए क़ानून बनाने के अलावा हमारे पास क्या विकल्प हैं?
बाल विवाह निषेध (संशोधन) अधिनियम 2021 में लड़कियों की शादी की उम्र को 18 से बढ़ाकर 21 साल करने का प्रस्ताव रखा गया है। लेकिन बाल विवाह को ख़त्म करने के लिए यह कदम काफ़ी नहीं होगा। -
भारत में व्यक्तिगत दान देने वालों तक पहुंचना
आँकड़ों के अनुसार आम लोग अब पहले से अधिक दान देते हैं। स्वयंसेवी संस्थाएँ ऐसे कई कदम उठा सकती हैं जिससे परोपकार के इस क्षेत्र से अधिकतम लाभ हासिल किया जा सके। -
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हमें फील्ड कार्यकर्ताओं के कौशल विकास को प्राथमिकता देने की जरूरत क्यों है
फील्ड में काम करने वाले हमारे कार्यकर्ताओं के कौशल और डिजिटल साक्षरता को बेहतर बनाना उनके लिए, संगठन के लिए और व्यापक स्तर पर सामाजिक क्षेत्र के लिए उपयोगी है। -
विधवाओं को परिवार के जमीन में हक़ नहीं मिलता
गुजरात में किए गए एक अध्ययन से यह पता चला है कि कोविड-19 के दौरान विधवा हुई महिलाएं अपनी भूमि अधिकारों तक पहुँचने के लिए संघर्ष कर रही हैं। -
सरकारी अधिकारियों की ग़लतियों का ख़ामियाज़ा आम आदमी क्यों भुगते?
राजस्थान के एक सामाजिक कार्यकर्ता के जीवन में एक दिन जो समुदायों को उनके अधिकारों तक पहुँचने में मदद करता है और एक सार्वजनिक जवाबदेही कानून की वकालत करता है। -