सामुदायिक विकास
स्थानीय समुदायों की भागीदारी, नेतृत्व और सामूहिक प्रयासों के जरिए सतत विकास के बढ़ावा देना ताकि लोग अपनी समस्याओं को खुद समझ सकें, समाधान खोज सकें और सकारात्मक बदलाव ला सकें।
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कॉमन्स और स्वशासन: समुदायों की भागीदारी क्यों जरूरी है
सामुदायिक संसाधनों पर चर्चा और जागरुकता बनाए रखने के लिए ग्राम-सभाओं को सशक्त बनाना और उनके एजेंडे को कॉमन्स और समुदाय की जरूरतों पर केंद्रित करना जरूरी हो गया है। -
जलवायु संकट से सुरक्षित भविष्य बनाने में समुदाय क्या भूमिका निभा सकते हैं?
जलवायु प्रयासों में अक्सर स्थानीय समुदायों और साझा संसाधनों की भूमिका अनदेखी रह जाती है जबकि इन्हें शामिल करना सामाजिक और न्यायिक नजरिए से जरूरी लगने लगा है। -
क्वीयर और ट्रांस समावेशन: ढांचागत सोच से सशक्त होगी भागीदारी
समावेशन पर चर्चा के बावजूद क्वीयर और ट्रांस व्यक्तियों को अब भी संस्थानों, आजीविका के विकल्पों और नीति-निर्माण के मंचों से व्यवस्थित बहिष्कार झेलना पड़ता है। -
आदिवासी समूहों की एकजुट पहल: जल और जमीन पर अधिकार की मांग
आदिवासी जनजातियां भू-अधिकारों और मत्स्य पालन को लेकर संगठित हो रही हैं, ताकि अपनी पारंपरिक आजीविका को सुरक्षित रख सकें। -
पानी बचाना है तो समुदाय को उसका मालिक बनाना होगा
पूर्वी और मध्य भारत में आदिवासी समुदायों की महिलाएं स्थायी जल संरक्षण प्रणाली की योजना, निर्माण और प्रबंधन का अभिन्न अंग हैं।