मेरा एक दिन
पहली पंक्ति के कार्यकर्ताओं (फ्रंटलाइन वर्कर) और पहले उत्तरदाताओं (फर्स्ट रिस्पोंडेंट) के दैनिक जीवन की एक झलक—उनकी भूमिकाएं, ज़िम्मेदारियां, चिंताएं, उम्मीदें और इच्छाएं।
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गुजरात की एक युवा महिला जो समुदाय से लेकर जंगल तक का ख्याल रखना जानती है
ग्रामीण गुजरात में रहने वाली 22 साल की अनीता बारिया अपने समुदाय के लिए रोजगार से लेकर पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी समस्याएं तक हल कर रही हैं। -
एक आदिवासी पत्रकार जो अनकही कहानियां कहने के लिए न्यूज़रूम छोड़ यूट्यूब पर आ गई
गुजरात की महिला पत्रकार यूट्यूब रिपोर्टिंग का इस्तेमाल, अनुसूचित जनजाति समुदायों को जागरुक करने और उनसे जुड़ी खबरें दुनिया तक पहुंचाने के लिए कर रही हैं। -
एक अकेली मां जो अपने गांव में कामकाजी महिलाओं के लिए नई राह बना रही है
यवतमाल के एक जमीनी कार्यकर्ता के जीवन का एक दिन जो महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने और अपने समुदाय को जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए तैयार करने की कोशिशों में लगी है। -
गढ़चिरौली की एक युवा-आदिवासी सरपंच जो न नक्सलियों से डरती है, न पुलिस से
एक युवा-आदिवासी महिला सरपंच के जीवन का एक दिन जो अपने समुदाय को कागजी कार्रवाई करने से लेकर आपात परिस्थितियों में मदद पहुंचाने तक का काम करती है। -
एक खिलाड़ी जो लैंगिक भेदभाव के ख़िलाफ़ अपनी लड़ाई फुटबॉल के मैदान पर लड़ती है
मुंबई की 19 वर्षीय फुटबॉल कोच, नेत्रावती अपने समुदाय में लैंगिक मानदंडों पर जागरूकता फैलाने के लिए खेल का इस्तेमाल करती है और लड़कियों को खेलने के लिए प्रोत्साहित करती है। -
“जो आपके रास्ते में है वही आपका रास्ता है”
गोरखपुर के एक गैर-बाइनरी कार्यकर्ता के जीवन का दिन जो छोटे बच्चों को लिंग संवेदनशीलता के बारे में सिखाता है और शहर में पर्यावरण जागरूकता और शिक्षा पर काम करता है। -
लेह का एक इन्वायरमेंटलिस्ट अपने गांव के लोगों को कचरा प्रबंधन के तरीक़े सिखाता है
अर्थशास्त्र में बीए करने वाले इन्वायरमेंटलिस्ट के जीवन का एक दिन जो अपने गांव में कचरा प्रबंधन और इकोटूरिज़्म के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए यूट्यूब, इंस्टाग्रैम और एनिमेटेड फ़िल्मों का इस्तेमाल करता है। -
घरेलू हिंसा के ख़िलाफ़ लड़ रही एक आदिवासी महिला के जीवन का दिन
खुद घरेलू हिंसा की पीड़िता, ग्रामीण राजस्थान की एक आदिवासी महिला हिंसा का सामना करने वाली अन्य महिलाओं को न्याय और हक़ दिलाने में उनकी मदद कर रही है। -
जहां चाह वहां राह
वाराणसी के एक छात्र रिलेशनशीप मैनेजर के जीवन का दिन जो ख़ासकर महामारी के दिनों में युवाओं को रोज़गार के लिए कौशल विकास में प्रशिक्षण देती हैं। -
“युवाओं की आवाज़ सुनी जानी चाहिए”
जमशेदपुर के एक स्वयंसेवी संस्था के संस्थापक के बारे में पढ़िये जो ट्रांसजेंडर, क्वीर और हाशिए पर जी रहे युवाओं को सशक्त बनाना चाहते हैं। -
स्थाई उत्पाद एवं आजीविका निर्माण
एक स्वयं सहायता समूह सदस्य और लीफ़ क्रशिंग मशीन ऑपरेटर बताती है कि कैसे उसकी पहली औपचारिक नौकरी से वह आत्मनिर्भर हुई और उसने अपने परिवार की आर्थिक मदद की। -
क्या भूमि अधिकार महिलाओं के भविष्य को सुरक्षित कर सकता है?
गुजरात में पैरालीगल कर्मचारी के जीवन का एक दिन जो महिलाओं के सम्पत्ति के अधिकार के महत्व को लेकर जागरूकता फैलाती है। वह विधवाओं को ज़मीन का मालिकाना हक़ दिलवाने और ज़मीन के रिकॉर्ड पर उनका नाम दर्ज करवाने में उनकी मदद करती है।