विशेष
-
“युवाओं की आवाज़ सुनी जानी चाहिए”
जमशेदपुर के एक स्वयंसेवी संस्था के संस्थापक के बारे में पढ़िये जो ट्रांसजेंडर, क्वीर और हाशिए पर जी रहे युवाओं को सशक्त बनाना चाहते हैं। -
स्थाई उत्पाद एवं आजीविका निर्माण
एक स्वयं सहायता समूह सदस्य और लीफ़ क्रशिंग मशीन ऑपरेटर बताती है कि कैसे उसकी पहली औपचारिक नौकरी से वह आत्मनिर्भर हुई और उसने अपने परिवार की आर्थिक मदद की। -
क्या भूमि अधिकार महिलाओं के भविष्य को सुरक्षित कर सकता है?
गुजरात में पैरालीगल कर्मचारी के जीवन का एक दिन जो महिलाओं के सम्पत्ति के अधिकार के महत्व को लेकर जागरूकता फैलाती है। वह विधवाओं को ज़मीन का मालिकाना हक़ दिलवाने और ज़मीन के रिकॉर्ड पर उनका नाम दर्ज करवाने में उनकी मदद करती है। -
ठीक होने की राह पर
नशे की लत और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर लोगों की सहायता करने वाले एक सलाहकार के जीवन का दिन। इस लत को छोड़ने में वह युवाओं की मदद के लिए अपने अनुभवों का इस्तेमाल करते हैं। -
आईडीआर इंटरव्यूज | अरुणा रॉय
जानीमानी सामाजिक कार्यकर्ता और आरटीआई और मनरेगा जैसे विभिन्न अधिनियमों के लिए किए गए आंदोलनों के पीछे एक प्रेरणा शक्ति के रूप में काम करने वाली अरुणा रॉय हमें बता रही हैं कि वास्तव में सहभागी आंदोलनों को टिकाऊ बनाए रखने के लिए क्या करना पड़ता है। और असहमति के अपने लोकतान्त्रिक अधिकार के लिए हमें क्यों लड़ना चाहिए। -
ओडिशा की एक शिल्पकार ने गढ़ी अपनी ही कहानी
ओड़िशा की एक शिल्पकार जो अपनी कहानी बता रही है कि कैसे उसने महिला शिल्पकारों के साथ मिलकर अपनी एक विश्वसनीय पहचान बनाई और समुदाय विकसित किया। -
“दिन समय पर शुरू तो होता है लेकिन समय पर ख़त्म नहीं होता”
हॉस्पिटैलिटी कार्यकर्ता के जीवन का एक दिन जो कोविड-19 के दौरान एक रिसॉर्ट चलाती हैं और सहयोगियों की अपनी टीम को सम्भालने का काम करती हैं। -
एक फ़ार्मर प्रोड़्यूसर कम्पनी कैसे चलाते है?
एक आदिवासी महिला हाशिए पर जी रहे किसानों की आय में सुधार लाने के लिए उन्हें एकत्रित करने वाली एक किसान उत्पादक कम्पनी (फ़ार्मर प्रोड़्यूसर कम्पनी या एफ़पीसी) का प्रबंधन करती है जिनकी मालिक महिलाएँ हैं। -
हर एक सर्वे से बाधाओं को तोड़ना
कर्नाटक में काम करने वाली एक एन्यूमरेटर (गणनाकार) के जीवन का एक दिन जो कामकाजी महिला होने की चुनौतियों और डाटा संग्रह में अच्छे संचार के महत्व के बारे में बताती हैं। -
सरकारी अधिकारियों की ग़लतियों का ख़ामियाज़ा आम आदमी क्यों भुगते?
राजस्थान के एक सामाजिक कार्यकर्ता के जीवन में एक दिन जो समुदायों को उनके अधिकारों तक पहुँचने में मदद करता है और एक सार्वजनिक जवाबदेही कानून की वकालत करता है। -
“कश्मीर में एक पत्रकार होना आसान नहीं है”
कश्मीर की एक महिला पत्रकार ने कार्यस्थल की मुश्किलों के साथ-साथ अनुच्छेद 370 के हटने और कोविड-19 के कारण घाटी में पत्रकारिता पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में हमसे बात की। -
कम समय, हजारों कहानियाँ: जमीन पर काम कर रहे एक पत्रकार की डायरी
उन्नाव के एक पत्रकार के जीवन का एक दिन जो यूपी चुनावों से लेकर दुर्घटनाओं और अपराधों के साथ-साथ स्थानीय न्यूज पर भी नजर रखता है।