सोशल सेक्टर में एंट्री करने वालों के लिए सलाहनामा
1. जब आप किसी प्रोजेक्ट के लिए फंडिंग जुटा रहे हों और खुद भी उसे बस 70% तक ही समझ पाए हों, लेकिन फिर भी फंडर को 100% कॉन्फिडेंस दिखाना हो! ऐसी सूरत में आपको यह करना है:

2. जब सरकारी अधिकारी मीटिंग में कहें, ‘आपका आइडिया तो बहुत अच्छा है, हम इस पर जरूर एक्शन लेंगे।’ इसका मतलब है:

3. जब आपको सेक्टर में पहली नौकरी मिले और आपसे कहा जाए, “अगर काम की समझ बनानी है, तो पहले यहां अनपेड इंटर्नशिप करनी होगी।” ऐसी नौकरी करते हुए आपका अंतर्मन:

4. फंडिंग एप्लीकेशन फॉर्म में अमूमन आपके फिंगरप्रिंट और डीएनए के अलावा सब मांग लिया जाता है! इसलिए आपको ऐसा होना पड़ेगा:

5. यहां हर एनजीओ वर्कर के पास एक सुपरपावर होनी चाहिए, जिससे वो किसी भी कहानी को किसी भी प्रोजेक्ट इम्पैक्ट के मुताबिक ढालकर यह कह सके:

6. जब छह महीने बाद भी प्रोजेक्ट का असर न दिखे, तो खुद को ये दिलासा देना जरूरी है कि आप दुनिया बदल कर रहेंगे। खुद को याद दिलायें कि प्रोसेस पर इतना भरोसा रखना है कि जब रिजल्ट आएगा, तो सब कहेंगे:

लेखक के बारे में
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राकेश स्वामी आईडीआर में सह-संपादकीय भूमिका मे हैं। वह राजस्थान से जुड़े लेखन सामग्री पर जोर देते हैं। राकेश के पास राजस्थान सरकार के नेतृत्व मे समुदाय के साथ कार्य करने का एवं अकाउंटेबलिटी इनिशिएटिव, सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च मे लेखन एवं क्षमता निर्माण का भी अनुभव है। राकेश ने आरटीयू यूनिवर्सिटी, कोटा से सिविल अभियांत्रिकी में स्नातक किया है।
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पूजा राठी आईडीआर हिंदी में संपादकीय विश्लेषक (एडिटोरियल एनालिस्ट) हैं। इससे पहले, उन्होंने फेमिनिज़्म इन इंडिया में सह-संपादक के रूप में काम किया है, जहां उन्होंने जेंडर, पर्यावरण और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों को कवर किया। पूजा को यूएन लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित किया गया है और वह 2024 की लाडली मीडिया फैलो भी रह चुकी हैं। इसके अलावा, वह खबर लहरिया की रूरल मीडिया फेलोशिप और एटलस फॉर बिहेवियर चेंज इन डेवलपमेंट की बिहेवियरल जर्नलिज़्म फेलोशिप की पूर्व फेलो रह चुकी हैं। पूजा ने पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त की है।
