तुम करते क्या हो…हैं?
वह देश बदल सकता है, सिस्टम जगा सकता है, आंदोलन कर सकता है। बस अपना काम समझाने के सिवा सोशल सेक्टर का योद्धा सब कर सकता है।
20 फ़रवरी 2026 को प्रकाशित
सरकारी या प्राइवेट?
जब आप बस में फोन पर बात करते हुए कहते हैं, “हां कल सीबीईओ से मिलना है…स्कूल में ड्रॉपआऊट बढ़ रहे हैं… कुछ तो करना पड़ेगा।” तब सामने बैठे यात्री:

प्रधानी की तैयारी?
जब आप गांव के अस्पताल में डॉक्टर की कमी के बारे में भाषण दें, “चलो सब मिलकर ज्ञापन देते हैं…जरूरत पड़े तो धरना भी देंगे!”

खूब कमाते हो बाबू?
जब आप कर्ज में डूबे किसानों को मुआवजा दिलाने कलेक्टर ऑफिस की ओर कूच कर दें:

कुछ काम-धाम करते हो या नहीं?
जब घर में सब आपके कज़न के 20 लाख के पैकेज पर लहालोट हो रहे हों, तब फूफाजी-मौसाजी के सवाल:

सुबह का भूला शाम को घर आएगा क्या?
जब आप पड़ोसी का राशन कार्ड, आंगनवाड़ी दीदी का आधार कार्ड और दूध-वाले का वोटर कार्ड बनवा चुके हों, तब आपके घरवाले:

लेखक के बारे में
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इंद्रेश शर्मा आईडीआर हिंदी में पार्टनरशिप और आउटरीच हेड हैं। वे संगठन की पहुंच बढ़ाने और असरदार साझेदारी बनाने के लिए विकास सेक्टर से जुड़े विभिन्न हितधारकों के साथ मिलकर काम करते हैं। इन्द्रेश संस्थागत सहयोग को मजबूत करने के साथ-साथ जमीनी संगठनों के लिए कैपेसिटी बिल्डिंग से जुड़े लेखन में भी सक्रिय रूप से योगदान देते हैं। उनके पास विकास सेक्टर में 13 वर्षों से अधिक का पेशेवर अनुभव है। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता, ग्रामीण विकास और पंचायती राज जैसे क्षेत्रों में काम किया है। इससे पहले वे सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च संस्था से जुड़े थे, जहां वे रिसर्च, कार्यक्रम निर्माण और प्रशिक्षण के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं।
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राकेश स्वामी आईडीआर में सह-संपादकीय भूमिका मे हैं। वह राजस्थान से जुड़े लेखन सामग्री पर जोर देते हैं। राकेश के पास राजस्थान सरकार के नेतृत्व मे समुदाय के साथ कार्य करने का एवं अकाउंटेबलिटी इनिशिएटिव, सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च मे लेखन एवं क्षमता निर्माण का भी अनुभव है। राकेश ने आरटीयू यूनिवर्सिटी, कोटा से सिविल अभियांत्रिकी में स्नातक किया है।
