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हल्का-फुल्का

बजट और हम: विकास सेक्टर की एक पुरानी कहानी के कुछ नए दृश्य

नए बजट से विकास सेक्टर में काम करने वालों को होने या ना होने वाले कुछ फायदे और नुकसान, जिनका ख्याल हमें आया।

हमारी खुशियों की वजह निराली है!

एक डुडल दूसरे से कहता है, "चलो, अब फंडर के पीछे तेजी से भाग पाएंगे"_बजट

कर तक बात ही नहीं पहुंचती, अपनी आय देखकर हम कर देते हैं…आंय!

डुडल उछलकर बजट में टैक्स कटने के बारे में बताते हुए_बजट

इस आय में आ क्या रहा है और जा क्या रहा है?

फेसबुक बैनर_आईडीआर हिन्दी
एक डुडल कहता है, "मुझे तो बस सैलरी और ईएमआई के बीच का अंतर कम करना है"_बजट

लेखक के बारे में

  • राकेश स्वामी आईडीआर में सह-संपादकीय भूमिका मे हैं। वह राजस्थान से जुड़े लेखन सामग्री पर जोर देते हैं। राकेश के पास राजस्थान सरकार के नेतृत्व मे समुदाय के साथ कार्य करने का एवं अकाउंटेबलिटी इनिशिएटिव, सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च मे लेखन एवं क्षमता निर्माण का भी अनुभव है। राकेश ने आरटीयू यूनिवर्सिटी, कोटा से सिविल अभियांत्रिकी में स्नातक किया है।
  • अंजलि मिश्रा, आईडीआर में हिंदी संपादक हैं। इससे पहले वे आठ सालों तक सत्याग्रह के साथ असिस्टेंट एडिटर की भूमिका में काम कर चुकी हैं। उन्होंने टेलीविजन उद्योग में नॉन-फिक्शन लेखक के तौर पर अपना करियर शुरू किया था। बतौर पत्रकार अंजलि का काम समाज, संस्कृति, स्वास्थ्य और लैंगिक मुद्दों पर केंद्रित रहा है। उन्होंने गणित में स्नातकोत्तर किया है।