पोषण माह में एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के अनुभव
पोषण माह के दौरान गुल्लक सीरीज़ के बहाने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की काल्पनिक प्रतिक्रियाएं।
27 सितंबर 2024 को प्रकाशित
1. जब कार्यकर्ता को आंगनवाड़ी केंद्र में पोषण सप्ताह मनाने के लिए कहा जाए और उसके लिए बजट ही न हो

2. जब माताएं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से कहें, “आपने तो कहा था कि बच्चे को पोषण मिलेगा लेकिन इसका तो बस वजन ही बढ़ता जा रहा है”

3. जब पोषण पर जागरुकता की बात हो और आला अधिकारी तस्वीरें खींचने और भेजने पर जोर दे रहे हों

4. जब समुदाय को दस बार खान-पान से जुड़ी बातें समझाने के बाद भी उन पर कोई असर न हो

5. जब कम्युनिटी मोबलाइजेशन करना हो तो समुदाय के साथ बात करते हुए

6. जब आंगनवाड़ी केंद्र में एक ही कमरा हो और उसमें भी सामान रखने की जगह न हो। कार्यकर्ता नए केंद्र के सपने देखते हुए

7. जब आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की ड्यूटी चुनावों या जनगणना में लगे

8. जब आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की सैलरी आती है

लेखक के बारे में
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अंजलि मिश्रा, आईडीआर में हिंदी संपादक हैं। इससे पहले वे आठ सालों तक सत्याग्रह के साथ असिस्टेंट एडिटर की भूमिका में काम कर चुकी हैं। उन्होंने टेलीविजन उद्योग में नॉन-फिक्शन लेखक के तौर पर अपना करियर शुरू किया था। बतौर पत्रकार अंजलि का काम समाज, संस्कृति, स्वास्थ्य और लैंगिक मुद्दों पर केंद्रित रहा है। उन्होंने गणित में स्नातकोत्तर किया है।
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सलोनी सिसोदिया आईडीआर में मल्टीमीडिया एनालिस्ट हैं। इससे पहले उन्होंने फेमिनिज़म इन इंडिया के साथ सीनियर डिजिटल एडिटर के रूप में भी काम किया है तथा जेंडर, कल्चर, समाज और सिनेमा जैसे विषयों पर मुख्य तौर पर अनुभव रखती हैं। सलोनी ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में अपनी पढ़ाई की है। वह फोटो निबंध, फोटोग्राफी और ट्रेवल करने में ख़ास रूचि रखती हैं।