कैपेसिटी बिल्डिंग
नेतृत्व और प्रतिभा, संचार, फंड की व्यवस्था और तकनीक पर सर्वोत्तम अभ्यास (बेस्ट प्रैक्टिस), सीख और कार्यात्मक सलाह।
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सरल-कोश: जलवायु परिवर्तन
विकास सेक्टर से जुड़े कठिन अंग्रेज़ी शब्दों को सरल हिंदी में समझें – जलवायु परिवर्तन। -
जिनके लिए शोध किए जा रहे हैं, उन्हें शोध में कैसे शामिल किया जाए?
जिन लोगों के साथ शोध किया जाता है उन्हें आमतौर पर डेटा के स्रोत के रूप में देखा जाता है, न कि उपयोगकर्ता के रूप में। -
सरल-कोश: कैपेसिटी बिल्डिंग
अंग्रेज़ी-हिंदी शब्दकोश - विकास सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले कठिन शब्दों की सरल व्याख्या। -
समाजसेवी संस्थाएं सायकोमेट्रिक टूल का प्रभावी उपयोग कैसे कर सकती हैं
संस्थाएं प्रभाव को मापने और समस्याओं की पहचान करने के लिए साइकोमेट्रिक साधनों का उपयोग करती हैं। यहां इन टूल्स के उपयोग के समय होने वाली पांच ग़लतियों से बचने के उपाय बताए गए हैं जिन्हें अपनाकर परिणाम को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। -
एक सफल डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के लिए क्या चाहिए
डिजिटाईजेशन किसी भी समाजसेवी संस्था के लिए न केवल कार्यक्रमों के संचालन बल्कि उनके नतीजों में भी सुधार लाने में मददगार साबित हो सकता है। -
भारतीय संविधान के बनने की कहानी क्या है?
भारतीय संविधान निर्माण की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और इससे जुड़े कुछ दिलचस्प तथ्य। -
सामाजिक उद्यमी कैसे बनें?
सामाजिक उद्यमी बनने के लिए आपको किन कौशलों की जरूरत है, वे कौन सी चुनौतियां है जिनका सामना आपको करना पड़ सकता है और वे कौन से पहलू हैं जहां आपको मदद की जरूरत पड़ती है। -
डिजिटल तकनीक से सीमित संसाधनों में पढ़ाई कैसे संभव है
संसाधनों की कमी एडटेक से दूरस्थ शिक्षा में आने वाली एक बड़ी बाधा है लेकिन शिक्षकों की सहभागिता से इसे आसान बनाया जा सकता है। -
फोन सर्वेक्षण करने के सबसे कारगर तरीके क्या हैं?
फ़ोन सर्वेक्षण करते हुए सर्वे करने वाली संस्था और उत्तरदाता के बीच विश्वसनीयता का संबंध बनाकर ही सार्थक और सटीक आंकड़ों तक पहुंचा जा सकता है। -
विकास सेक्टर में मजबूत फैसिलिटेटर बनने के आठ नुस्खे
फैसिलिटेशन, विकास सेक्टर में काम करने वाले साथियों के काम में शामिल एक अनिवार्य चीज है। यह वीडियो फैसिलिटेशन के दौरान आने वाली कुछ समस्याओं और उनके समाधानों पर बात करता है। -
समाजसेवी संस्थाएं अपनी विफलताओं पर बात क्यों नहीं करती हैं?
कुछ वास्तविक तो कुछ काल्पनिक जोखिम, समाजसेवी संस्थाओं को उनकी असफलता पर बात करने से रोकते हैं लेकिन अगर संस्थाएं और फंडर्स चाहें तो इस पर सहज संवाद हो सकता है। -
क्यों सामाजिक संस्थाओं को लोकल और ग्लोबल स्तर पर साथ काम करना चाहिए
आने वाले समय में सामाजिक संस्थाओं की प्रासंगिकता इस बात से भी तय होगी कि छोटे स्तर पर किए जा रहे उनके प्रयास वैश्विक तस्वीर का हिस्सा किस तरह से बन रहे हैं।