
इंद्रेश शर्मा
इंद्रेश शर्मा आईडीआर हिंदी में पार्टनरशिप और आउटरीच हेड हैं। वे संगठन की पहुंच बढ़ाने और असरदार साझेदारी बनाने के लिए विकास सेक्टर से जुड़े विभिन्न हितधारकों के साथ मिलकर काम करते हैं। इन्द्रेश संस्थागत सहयोग को मजबूत करने के साथ-साथ जमीनी संगठनों के लिए कैपेसिटी बिल्डिंग से जुड़े लेखन में भी सक्रिय रूप से योगदान देते हैं। उनके पास विकास सेक्टर में 13 वर्षों से अधिक का पेशेवर अनुभव है। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता, ग्रामीण विकास और पंचायती राज जैसे क्षेत्रों में काम किया है। इससे पहले वे प्रथम और सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च संस्थाओं से जुड़े रहे हैं, जहां उन्होंने रिसर्च, कार्यक्रम निर्माण और प्रशिक्षण जैसे कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई है।
इंद्रेश शर्मा के लेख
लैंगिक विषय आदिवासी महिलाओं के साथ काम करने वाली संस्थाएं, इन पांच आंकड़ों पर ध्यान दें
प्रदान द्वारा जारी आदिवासी आजीविका रिपोर्ट के महिलाओं से जुड़े कुछ आंकड़े जो शिक्षा, स्वास्थ्य, निर्णय क्षमता जैसे विषयों पर उनकी स्थिति का पता देते हैं।हल्का-फुल्का चिराग तले अंधेरा
समाजसेवी संस्थाओं के उद्देश्य और उससे अलग राह जाती उनकी नीतियां।हल्का-फुल्का कथनी और करनी
शिक्षा व्यवस्था और उसकी ईमानदारी के किस्से।हल्का-फुल्का कभी-कभी हेड ऑफिस से आने वाले फील्ड टीम की ‘मदद’ कैसे करते हैं?
कुछ स्थितियां जब हेड ऑफिस से आने वालों को ज़मीनी कार्यकर्ताओं की मदद की ज़रूरत होती है।हल्का-फुल्का बजट के बादल, हम पर जाने कब बरसेंगे?
विकास सेक्टर को भी बजट से उम्मीद थी कि वो बरसे तो कुछ बात आगे बढ़े।हल्का-फुल्का समझदार वोटर को पता है कि नेताओं से कब काम करवाना है
राजनीतिक पार्टियों के बदलते रंग-ढंग देखकर अब वोटर ज़्यादा समझदार होते जा रहे हैं।हल्का-फुल्का जब पीनी पड़े चाय पे चाय, फिर भी काम ना हो पाए!
सरकारी दफ़्तर और ग़ैर-सरकारी संगठनों से जुड़े लोग, और वे नज़ारे जो चाहे-अनचाहे अक्सर ही दिख जाते हैं।पर्यावरण क्या शिमला शहर का अस्तित्व अब संकट में है?
शिमला उदाहरण है कि कैसे कोई शहर अनियोजित निर्माण, जलवायु परिवर्तन तथा असंगत विकास नीतियों के चलते अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ने पर मजबूर हो सकता है।







