सेक्टर
आईडीआर इंटरव्यूज़ | ए रेवती
ट्रांस महिला के रूप में अपनी पहचान अपनाने से लेकर जमातों तक—ए. रेवती बता रही हैं कि उन्होंने समुदाय को एकजुट करना और थिएटर व लेखन के ज़रिए अपने दिल की बात कहना कैसे सीखा।आपदा से जूझता नागालैंड और सवालों के घेरे में राहत का सिस्टम
जुलाई 2026 में पूर्वी नागालैंड की बाढ़ ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं—क्या राज्य का अर्ली वार्निंग सिस्टम तैयार था? क्या सरकारी राहत समय पर पहुंची? और क्या मीडिया प्रभावित इलाकों की पूरी तस्वीर सामने ला पाया?नेपाल आपदा: फिर उजागर हुई क्षेत्रीय तैयारी, तालमेल मजबूत करने की ज़रूरत
यह आपदा मज़बूत क्षेत्रीय सहयोग की ज़रूरत को दिखाती है, जिसमें सरकारों को सीमा-पार के खतरों से निपटने के लिए मिलकर कदम उठाने होंगे।शिक्षा और असमानता के बीच समुदाय का पुल
जहां औपचारिक व्यवस्था की पहुंच सीमित है, वहां सामुदायिक परिवेश वंचित छात्रों के लिए नई राह बना रहे हैं। जानिए, यह बदलाव कैसे हो रहा है।साइबर अपराध और महिलाएं: अधूरे आंकड़े, अधूरे वादे
महिलाओं की साइबर सुरक्षा पर संसद की रिपोर्ट एक बड़ा सवाल उठाती है—कौन साइबर दुर्व्यवहार की शिकायत दर्ज करा पाता है और कौन आंकड़ों से बाहर रह जाता है?फोटो निबंध: छबड़ा थर्मल पावर प्लांट और गांवों का संघर्ष
छबड़ा थर्मल पावर प्लांट भले ही राजस्थान को रोशन करता है, लेकिन इसके आसपास के गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं और बढ़ते प्रदूषण से जूझ रहे हैं।क्या छात्रों के अनुभव छात्रवृत्ति की नीतियां बदल सकते हैं?
देश का स्कॉलरशिप सिस्टम वंचित छात्रों की ज़रूरतों को पूरा नहीं कर पा रहा है। ऐसे में समुदाय-आधारित मॉडल उनके लिए सहयोग की एक नई राह दिखा सकते हैं।क्या मेघालय के स्वास्थ्य आंकड़े पूरी सच्चाई बताते हैं?
मेघालय को ऐसे स्वास्थ्य आंकड़ों की ज़रूरत है, जो उसकी जातीय और भौगोलिक विविधता को सही तरह से दिखाएं। अच्छे डैशबोर्ड समाधान का सिर्फ़ आधा हिस्सा हैं।पलायन के साये में महिलाओं का मानसिक स्वास्थ्य
झारखंड की ग्राम पंचायत मुखिया पिंकी बारदा बता रही हैं कि पलायन से प्रभावित गांवों में महिलाओं का जीवन किन चुनौतियों, अकेलेपन और आपसी सहारे के बीच गुज़रता है।