मेघालय के री भोई ज़िले की महिला बुनकर पारंपरिक रूप से रेशम के कीड़ों का पालन करती रही हैं। लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती ठंड ने इस प्रक्रिया को बेहद मुश्किल बना दिया है।
इस वीडियो से समझिए कि वे कैसे रेशम के कीड़ों की देखभाल करती हैं, और कोकून से नाज़ुक धागे बुनती हैं।
सम्मे मस्सर आईडीआर नॉर्थईस्ट फेलो 2025–26 हैं।
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लेखक के बारे में
- सम्मे मस्सर आईडीआर नॉर्थईस्ट मीडिया फेलो, 2025–26 हैं। वह शिलांग, मेघालय स्थित गैर-लाभकारी संगठन फेथ फाउंडेशन में जनसंपर्क संभालने वाले कम्यूनिकेशन्स डेवलपर के रूप में काम करते हैं। सम्मे एक वीडियोग्राफर भी हैं और उन्हें कहानियां रचने से गहरा लगाव है। उनका मानना है कि अच्छी कहानियां समाज में बदलाव का मार्ग प्रशस्त करती हैं। अपने खाली समय में सम्मे फुटबॉल देखना और खेलना पसंद करते हैं।
