पर्यावरण

बदलता मौसम, बढ़ती मुश्किलें: मेघालय में रेशम कीट पालन पर संकट​

अन्य भाषाओं में पढ़ें:
हिंदी

​​मेघालय के री भोई ज़िले की महिला बुनकर पारंपरिक रूप से रेशम के कीड़ों का पालन करती रही हैं। लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती ठंड ने इस प्रक्रिया को बेहद मुश्किल बना दिया है। ​ 

​​इस वीडियो से समझिए कि वे कैसे रेशम के कीड़ों की देखभाल करती हैं, और कोकून से नाज़ुक धागे बुनती हैं।​ 

​​सम्मे मस्सर आईडीआर नॉर्थईस्ट फेलो 2025–26 हैं। ​ 

– 

​​अधिक जानें:​ देखें​, राजस्थान का कलंदर समुदाय आरा-तारी की सुई से अपनी आजीविका कैसे बुनता है? ​ 

​​अधिक करें:​​ लेखक से जुड़ने और उन्हें सहयोग देने के लिए उनसे ​wanmi0007@gmail.com​ पर संपर्क करें।​​ 

लेखक के बारे में

  • सम्मे मस्सर आईडीआर नॉर्थईस्ट मीडिया फेलो, 2025–26 हैं। वह शिलांग, मेघालय स्थित गैर-लाभकारी संगठन फेथ फाउंडेशन में जनसंपर्क संभालने वाले कम्यूनिकेशन्स डेवलपर के रूप में काम करते हैं। सम्मे एक वीडियोग्राफर भी हैं और उन्हें कहानियां रचने से गहरा लगाव है। उनका मानना है कि अच्छी कहानियां समाज में बदलाव का मार्ग प्रशस्त करती हैं। अपने खाली समय में सम्मे फुटबॉल देखना और खेलना पसंद करते हैं।