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स्वास्थ्य और पोषण

शिलांग में बाल काउंसलरों के लिए सहयोग का सवाल   

युवाओं का समूह जिसमें सभी एक दूसरे का हाथ पकड़े हुए हैं_बाल काउंसलर
1 दिसंबर 2025 को प्रकाशित

मैं आईडीआर नॉर्थईस्ट फेलो होने के साथ-साथ शिलांग, मेघालय में स्थित गैर-लाभकारी संस्था फेथ फाउंडेशन में भी बतौर कम्यूनिकेशन्स डेवलपर काम करता हूं। यह संस्था राज्य के ऐसे चंद गैर-लाभकारी संगठनों में से है, जो बाल यौन शोषण की रोकथाम और सर्वाइवर्स को सहयोग देने का काम करते हैं।

हमारे यहां परामर्शदाताओं, यानी काउंसलरों की एक टीम है जो सर्वाइवर्स को मनो-सामाजिक सहारा देती है। इसके लिए वे उनके परिवारों के साथ बातचीत करते हैं और बच्चों व किशोरों के पुनर्वास के लिए चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के साथ मिलकर काम करते हैं।

बच्चों और उनके परिवारों को झिझक और सामाजिक रूढ़ियों से परे जाकर अपने अनुभव बांटने के लिए समानुभूति और लगातार बातचीत की जरूरत होती है। काउंसलर की तरह काम करने वाली शेरिल लिंडा रिंटाथियांग बताती हैं, “हम ध्यान से उनकी बातें सुनते हैं, खेल-खेल में थैरेपी देने की तकनीक अपनाते हैं और आपसी भरोसा बढ़ाने वाली गतिविधियां करवाते हैं।”

लेकिन लोगों की वेदना और त्रासदी से जुड़े अनुभवों को लगातार सुनना कोई आसान काम नहीं है। बहुत से काउंसलर यह स्वीकार करते हैं कि संतोषजनक काम होने के बावजूद मानसिक तनाव इस पेशे की एक ऐसी सच्चाई है, जो समय के साथ बढ़ता ही जाता है।

उदाहरण के लिए, कुछ केस ऐसे होते हैं जो लंबे समय तक उनके ज़ेहन में बरकरार रहते हैं, जिससे वे मानसिक रूप से प्रभावित होते हैं और उनकी पेशेवर-निजी जिंदगी का संतुलन भी बिगड़ जाता है। एक काउंसलर कहते हैं, “कई रातें ऐसी होती हैं, जब मैं किसी बच्चे के बारे में सोचने से खुद को रोक नहीं पाता हूं। ये सब आपके काबू में नहीं होता है।”

चूंकि अधिकांश काउंसलर महिला होती हैं, इसलिए उन्हें अक्सर लैंगिक भेदभाव का सामना करना पड़ता है। लोग उनसे उम्मीद करते हैं कि वे चुपचाप सारी बातें सुनें। कई बार उनके ऊपर परिवार के निजी मामलों में दखलंदाजी के आरोप भी लगते हैं। खासकर ऐसे मामलों में, जहां शोषण परिवार के ही किसी सदस्य द्वारा किया गया होता है। रूढ़िवादी धार्मिक मान्यताओं के चलते भी, कई बार ऐसे मामलों को सार्वजनिक करने से बचा जाता है, जिससे अपराधियों को और शह मिलती है।

मेघालय के सामाजिक सेक्टर में मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा अभी अपने शुरुआती दौर में है। इसलिए अधिकांश काउंसलरों के पास ऐसा कोई सपोर्ट ग्रुप नहीं है, जिसके साथ वे अपनी चुनौतियां बांट सकें। इसके अलावा उनके लिए घर-परिवार के अंदर भी अपनी भावनाओं के बारे में बात करना मुमकिन नहीं होता है। इन तमाम परिस्थितियों के बीच उनके पास सिर्फ अपने सह-कर्मियों से बात करने का विकल्प ही बाकी रह जाता है।

बतौर केस-वर्कर काम करने वाली रोज़ा बदरीशिशा कुर्बाह बताती हैं, “शाम की सैर के बाद मेरा मन थोड़ा हल्का हो पाता है।” वहीं काउंसलर ऐटिलिन वानियांग कहती हैं, “जब मेरा मन भारी होता है तो मैं बच्चों के लिए प्रार्थना करती हूं। इसके बाद मुझे थोड़ा बेहतर महसूस होता है।”

इस पेशे को अपनाने वाले बहुत से दूसरे लोग भी अपना ध्यान भटकाने के लिए अक्सर संगीत का सहारा लेते हैं, जिससे उन्हें अपनी निजी और पेशेवर जिंदगी के बीच फासला रखने में मदद मिलती है।

वे मानते हैं कि उनके काम से समाज में जो बदलाव आता है, उससे उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। लेकिन साथ ही वे यह भी कहते हैं कि इस पेशे से जुड़ी अंदरूनी दुनिया को भी छोटे-छोटे बदलावों की दरकार है।       

ऐटिलिन कहती हैं, “ट्रॉमा-इनफॉर्म्ड केयर, व्यवहार प्रबंधन और तनाव प्रबंधन जैसे विषयों पर कौशल-विकास की वर्कशॉप हमारे लिए बेहद मददगार हो सकती हैं।” इसके अलावा, वे यह भी सुझाव देते हैं कि हर महीने भावनात्मक डिब्रीफिंग सत्र होने चाहिए, जिनमें वे अपने जमीनी अनुभव साझा कर सकें और यह बता सकें कि वे उनके ऊपर क्या असर छोड़ते हैं। जैसे-जैसे मेघालय मानसिक स्वास्थ्य के विषय में जागरूक बन रहा है, इस पेशे से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि आने वाले समय में ऐसे कई मंच बनें, जहां पूरे राज्य के तमाम पेशेवर अपने अनुभव एक-दूसरे के साथ बांट पायें।

लेकिन जब तक समाज इस मील के पत्थर तक नहीं पहुंचता, तब तक अगर इन पेशेवरों को अपना मन हल्का करने, आराम करने और रचनात्मक तरह से सोचने का माहौल और अवसर मिले, तो ये भी अपनेआप में एक बड़ी पहल होगी। या उनसे लगातार बस इतना ही पूछते रहना कि “आप ठीक हैं न?”

रोज़ा कहती हैं, “हमें आराम की अहमियत को समझना है और एक दूसरे को यह याद दिलाना है कि मानसिक रूप से कठिन केस के बाद खुद को आराम देना बहुत जरूरी है।”

इस लेख में बायाकमेनभा वन्खार ने भी योगदान दिया है, जो पेशे से एक काउंसलर हैं।

सम्मे मस्सर आईडीआर नॉर्थईस्ट फेलो 2025–26 हैं। उनका फेथ फाउंडेशन के सह-संस्थापक और निदेशक से संबंध है।

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अधिक जानें: पढ़ें, कैसे मेघालय में फुटबॉल बच्चों को स्कूल वापस ला रही है। 

अधिक करें: लेखक से जुड़ने और उन्हें सहयोग देने के लिए उनसे wanmi0007@gmail.com पर संपर्क करें।​             

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