नागरिक संगठन
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फील्ड कार्यकर्ताओं के लिए रिपोर्टिंग से जुड़ी समस्याओं के कुछ सटीक समाधान
रिपोर्टिंग से जुड़ी समस्याओं के लिए जरूरी है कि फील्ड कार्यकर्ता मैनेजर के साथ चर्चा करके समाधान तैयार करें और संस्थाएं इसके लिए गुंजाइश रखें। -
मराठवाड़ा का अपनी तरह का एक अनोखा एकल महिला संगठन
द थर्ड आई के इस पॉडकास्ट में सुनें मराठवाड़ा, महाराष्ट्र में बने एकल महिलाओं के अनोखे संगठन के बारे में। और, जानें यह कैसे बना और कैसे लोगों की जिंदगी बदल रहा है। -
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जन-संगठन आर्थिक आत्मनिर्भरता कैसे हासिल कर सकते हैं?
जमीनी संगठनों के लिए समुदाय से रिश्ता बनाए रखना सबसे अधिक जरूरी है क्योंकि समुदाय, यदि संगठन की अहमियत समझेगा तो वह उसकी आर्थिक जरूरतों का भी खयाल रखेगा। -
सामाजिक एवं भावनात्मक शिक्षा युवाओं के लिए क्यों जरूरी है?
सामाजिक एवं भावनात्मक शिक्षा यानि सेल, युवाओं को पढ़ाई के साथ-साथ उनके दैनिक जीवन की चुनौतियों का समाधान करने में भी मदद करता है। -
रोहिंग्या संकट में नागरिक समाज संगठन कैसे मदद कर सकते हैं?
भारत में रोहिंग्या समुदाय को उनके अधिकारों से वंचित किया गया है, वे विस्थापित हैं और अदृश्य कर दिए गए हैं। नागरिक समाज उन्हें एक गरिमामय जीवन तक पहुंचने में कैसे मदद कर सकता है? -
सामाजिक क्षेत्र को पूर्वोत्तर भारत में काम करने के बारे में क्या सीखना चाहिए?
साथ ही जानिए, क्यों समाजसेवियों और फंडर्स को पूर्वोत्तर भारत के लिए सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कार्यक्रम बनाने से पहले वहां के स्थानीय संदर्भों को समझ लेना चाहिए। -
मक्कला ग्राम सभा: सक्रिय नागरिक समाज बनाने के लिए स्थानीय शासन में बच्चों की भागीदारी
कर्नाटक की 'मक्कला ग्राम सभाएं' बच्चों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यहां चर्चा की गई है कि इसे और प्रभावी तरीक़े से कैसे कर सकते हैं। -
सरल-कोश: विज़न और मिशन
अंग्रेज़ी-हिंदी शब्दकोश: विकास सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले कठिन शब्दों की सरल व्याख्या - विज़न और मिशन। -
फोटो निबंध: कैसे औद्योगीकरण ने एन्नोर को तबाही की तरफ़ धकेल दिया है
कभी उपजाऊ आर्द्रभूमि रहा एन्नोर अब भीषण पर्यावरण संकट का सामना कर रहा है जिसने लोगों के स्वास्थ्य और आजीविका को बुरी तरह प्रभावित किया है। -
देश में प्राकृतिक संसाधनों के वास्तविक हक़दार कौन लोग हैं?
प्राकृतिक संसाधनों के खनन को लेकर वर्तमान रवैया, उस इलाक़े के लोगों पर अतिरिक्त बोझ डालता है और साथ ही भावी पीढ़ियों को उनके हिस्से से वंचित करता है।