नागरिक संगठन
क्या है एक रिर्सचर का काम
सीमित फंडिग का क्या हैं परिणाम, समस्याओं की पहचान या समस्याओं का आविष्कार?घर से काम करने में कई सुविधाएं हैं, लेकिन उसकी अपनी दुविधाएं हैं
वर्क फ़्रॉम होम में अक्सर दिखने वाले वे दृश्य जिनका हिस्सा आप नहीं बनना चाहेंगे।विकास सेक्टर में मजबूत फैसिलिटेटर बनने के आठ नुस्खे
फैसिलिटेशन, विकास सेक्टर में काम करने वाले साथियों के काम में शामिल एक अनिवार्य चीज है। यह वीडियो फैसिलिटेशन के दौरान आने वाली कुछ समस्याओं और उनके समाधानों पर बात करता है।जब पीनी पड़े चाय पे चाय, फिर भी काम ना हो पाए!
सरकारी दफ़्तर और ग़ैर-सरकारी संगठनों से जुड़े लोग, और वे नज़ारे जो चाहे-अनचाहे अक्सर ही दिख जाते हैं।क्यों सामाजिक संस्थाओं को लोकल और ग्लोबल स्तर पर साथ काम करना चाहिए
आने वाले समय में सामाजिक संस्थाओं की प्रासंगिकता इस बात से भी तय होगी कि छोटे स्तर पर किए जा रहे उनके प्रयास वैश्विक तस्वीर का हिस्सा किस तरह से बन रहे हैं।पर्यावरण बचाने के लिए आंदोलन खड़ा करने में क्या-क्या लगता है?
पर्यावरणविद स्टालिन दयानंद, पर्यावरण से जुड़े आंदोलनों में जनभागीदारी पर बात कर रहे हैं और बता रहे हैं क्यों ये विकास विरोधी नहीं कहे जा सकते हैं।जब हेडऑफिस से कोई विज़िट पर आता है…
हेडऑफिस वालों की फील्ड विज़िट के दौरान ज़मीनी कार्यकर्ता क्या करते हैं, जानिए उन्हीं की ज़ुबानी।क्या भारत की राजनीतिक व्यवस्था में सुधार का वक्त आ गया है?
हमें राजनीति में खेल के नियमों को बदलने की जरूरत है क्योंकि इसने सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को राजनीतिक प्रक्रिया पर हावी होने दिया है।जलवायु परिवर्तन से जुड़े साझा प्रयासों में जी20 की भूमिका
जी20 में, सदस्य देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देकर, ग्लोबल साउथ में जलवायु अनुकूलन के लिए प्रयासों को महत्वपूर्ण रूप से आगे बढ़ाने की क्षमता है।एफसीआरए लाइसेंस रद्द होने का सबसे ज्यादा नुकसान किसे होगा?
समाजसेवी संस्थाओं के एफसीआरए लाइसेंस रद्द होने का असर बढ़ी हुई बेरोज़गारी, हताश समुदाय और कमजोर लोकतंत्र के रूप में दिख सकता है।एफसीआरए क्या है और समाजसेवी संस्थाओं के लिए यह महत्वपूर्ण क्यों है?
विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) का इतिहास, भारतीय समाजसेवी संस्थानों पर प्रभाव और इससे जुड़े विवादों की जानकारी।कैसे समाजसेवी संगठन अपनी कहानी सकारात्मकता से कह सकते हैं?
सामाजिक संगठनों का अपने कार्यक्रमों की पिच तैयार करते हुए सकारात्मक भाषा और उदाहरण अपनाना सोच बदलने वाला साबित होगा।