विकास सेक्टर
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एक सफल रेडियो अभियान के लिए क्या चाहिए?
समाजसेवी संस्था साहस द्वारा ई-वेस्ट से जुड़ी जागरुकता बढ़ाने के लिए चलाए गए रेडियो अभियान के अनुभव, प्रचार अभियानों के डिज़ाइन तैयार करना सिखाते हैं। -
एफसीआरए लाइसेंस रद्द होने का सबसे ज्यादा नुकसान किसे होगा?
समाजसेवी संस्थाओं के एफसीआरए लाइसेंस रद्द होने का असर बढ़ी हुई बेरोज़गारी, हताश समुदाय और कमजोर लोकतंत्र के रूप में दिख सकता है। -
मध्य प्रदेश में आदिवासियों को उनके वन अधिकार क्यों नहीं मिल पा रहे हैं?
वन अधिकार अधिनियम, आदिवासियों को जंगल और जमीन का अधिकार तो दे देता है लेकिन उनके कागज नहीं दिलवा पा रहा है। -
सागर को गागर
जलवायु परिवर्तन को लेकर जमीनी समझ और सलाहकारों का ज्ञान कई बार मेल नहीं खाते हैं। -
कैसे समाजसेवी संगठन अपनी कहानी सकारात्मकता से कह सकते हैं?
सामाजिक संगठनों का अपने कार्यक्रमों की पिच तैयार करते हुए सकारात्मक भाषा और उदाहरण अपनाना सोच बदलने वाला साबित होगा। -
बीते तीन महीनों से मणिपुर में हो रही हिंसा के प्रभाव की कहानी
मणिपुर में सामाजिक न्याय के लिए महीनों से चल रहे संघर्ष और हिंसा की पूरी कहानी और यह भी कि आप कहां और कैसे मददगार बन सकते हैं। -
क्या शिक्षा से जुड़े डेटा केवल नीति निर्माताओं के ही काम आते हैं?
शिक्षा के क्षेत्र में बच्चे के सीखने से जुड़े आंकड़े नीति-निर्माताओं के लिए तो उपयोगी होते हैं पर शिक्षकों के लिये नहीं, क्यों? -
विमुक्त जनजातियों पर पुलिसिया पहरे के पीछे जातिवाद है
अंग्रेज़ी राज में बनी आपराधिक न्याय प्रणाली आज भी पुलिस के लिए विमुक्त जनजातियों और पिछड़े समुदायों के उत्पीड़न का हथियार बन रही है। -
पानी बचाना है तो समुदाय को उसका मालिक बनाना होगा
पूर्वी और मध्य भारत में आदिवासी समुदायों की महिलाएं स्थायी जल संरक्षण प्रणाली की योजना, निर्माण और प्रबंधन का अभिन्न अंग हैं। -
महिलाएं जलवायु परिवर्तन के काम को रफ्तार दे सकती हैं
महिलाओं के लिए एक ऐसा वातावरण बनाने की जरूरत है जहां वे जलवायु समस्याओं के हल खोजने में प्रमुख भूमिका निभा सकें क्योंकि ये उन्हें सबसे अधिक प्रभावित करती हैं। -
आत्मदाह और एसिड हमले के पीड़ितों को मुख्यधारा में कैसे लाया जाए?
एसिड हमले और आत्मदाह के पीड़ितों को ऐसे पुनर्वास कार्यक्रमों की जरूरत है जिनमें समाज और वे खुद भी उन्हें उनके बदले स्वरूप में स्वीकार कर सकें। -
क्यों शिक्षकों को उनके काम का पूरा श्रेय मिलना जरूरी है
शिक्षकों के काम को न केवल कम आंका जाता है बल्कि अक्सर उनकी भावनात्मक और प्रशासनिक मेहनत को महत्व नहीं दिया जाता है, इस पर ध्यान देना उनके समग्र स्वास्थ्य की बेहतरी के लिए जरूरी है।