विकास सेक्टर
प्रकृति को बचाने वालों का ख़याल कौन रखेगा?
संरक्षण के काम में जुटे लोग किस कीमत पर इसे अंजाम दे रहे हैं? सीमित संसाधनों के संकट से जूझते संरक्षणकर्मियों का मानसिक स्वास्थ्य भी अब संकट में है।विकलांगता पर काम करने वाली संस्थाओं को फंडिंग क्यों नहीं मिलती?
भारत में सीएसआर फंडिंग का एक प्रतिशत से भी कम हिस्सा विकलांगता क्षेत्र तक पहुंचता है। एक नयी रिपोर्ट बता रही कि है कि इस स्थिति को कैसे बदला जा सकता है।आपको वेलकम किट मिली क्या?
हर नौकरी एक वेलकम किट साथ लाती है। बस किसी में लैपटॉप होता है, तो किसी में सर्वे का रजिस्टर। पेश है कॉर्पोरेट और एनजीओ की दुनिया का एक आम पहला दिन।डेटा से नहीं, लोगों से सीखना
भारत के ट्रकिंग समुदाय के साथ काम करते हुए हमने जाना कि फील्ड में समय बिताना, भरोसा बनाना और उन समुदायों को समझना कितना अहम है, जो अक्सर औपचारिक आंकड़ों से बाहर रह जाते हैं।फंडर से बातचीत? योगा से होगा!
फंड आए न आए, सांस आती रहेगी!जून 2026 एफसीआरए संशोधन: नॉन-प्रॉफिट संस्थाओं के लिए इसके क्या मायने हैं?
गृह मंत्रालय ने एफसीआरए नियमों में संशोधन किया है। जानिए क्या सब बदला है और आपकी संस्था कैसे इन नए नियमों का पालन कर सकती है।क्या सोशल सेक्टर सवाल पूछने से कतराने लगा है?
जैसे-जैसे गैर-लाभकारी संस्थाओं का प्रभाव बढ़ रहा है, क्या उनकी स्वतंत्र और सवाल उठाने वाली आवाज़ कमज़ोर पड़ती जा रही है?लीक: हमारी सबसे सफल सूचना व्यवस्था
फंडिंग से लेकर सैलरी और एमओयू की शर्तों तक, कुछ सूचनाएं ऐसी होती हैं जो आधिकारिक घोषणा से पहले ही सार्वजनिक संपत्ति बन जाती हैं।सामाजिक संस्थाओं में कम्युनिकेशन को ‘जुगाड़’ नहीं, व्यवस्था की ज़रूरत है
गैर-लाभकारी संस्थाएं अक्सर कम्युनिकेशन से जुड़ी चुनौतियों का समाधान अधिक लोगों की नियुक्ति करने या एकबारगी कार्यशालाओं में निवेश करने में तलाशती हैं।साझा संसाधनों के लिए क्यों ज़रूरी है सामुदायिक डेटा?
समुदायों का कॉमंस से पुराना रिश्ता है, जिसमें उनकी मौखिक परंपराएं, अनुभव और ज्ञान शामिल हैं। सवाल यह है कि क्या डेटा प्रणालियां इस रिश्ते को अहमियत देने के लिए तैयार हैं?