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कोविड-19 ने साफ़ किया है कि ग्रामीण रोज़गार को बनाए रखने में मनरेगा की क्या भूमिका है
एक अध्ययन के मुताबिक़ मनरेगा ने कोविड-19 के दौरान गांवों में रोज़गार की स्थिति को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है लेकिन इसका बजट और जवाबदेही बढ़ाने की ज़रूरत है। -
जब तक जातिगत समुदायों की कोई जानकारी ही नहीं होगी तो उनके विकास की तैयारी कैसे होगी?
भारतीय प्रशासन जाति-आधारित भेदभाव पर आंकड़े और जानकारी इकट्ठा करने से व्यवस्था के स्तर पर इनकार करता है लेकिन यह इसके ही विकास के प्रयासों को कमजोर करता है। -
भारत का एक ज़िम्मेदार और सक्रिय नागरिक कैसे बनें?
तरीके जिनकी मदद से एक नागरिक मतदान से इतर भी सरकार से जुड़कर स्थानीय, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर नीति-निर्माण में हिस्सा ले सकता है। -
ग्रामीण महिला किसानों को सशक्त बनाने वाला एक मॉडल जो उन्हीं से मज़बूत बनता है
कभी आपदाओं से निपटने के लिए बनाया गया यह स्वयं सहायता समूह आज ग्रामीण महिला किसानों को खाद्य सुरक्षा, आर्थिक आत्मनिर्भरता से लेकर सार्वजनिक नेतृत्व तक के सबक़ सिखा रहा है। -
भारत में पिछड़े समुदायों और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के बीच की दूरी कम क्यों नहीं हो रही है?
भारत में थैरेपिस्ट अक्सर मानसिक स्वास्थ्य में मदद चाहने वालों को अपने सामाजिक तबके से अलग मानते हैं। एक अध्ययन बताता है कि क्यों यह नजरिया कारगर नहीं है और इसे सही करने के लिए क्या उपाय अपनाए जा सकते हैं। -
कैसे कार्यबल में मुसलमान महिलाओं के शामिल न हो पाने की पहली वजह पक्षपात भरी नियुक्तियां हैं
एक हालिया अध्ययन के अनुसार, भारत में मुसलमान महिलाओं को हिंदू महिलाओं की तुलना में प्रवेश-स्तर की नौकरियां मिलने की संभावना लगभग आधी होती है। ऐसे में एक समावेशी प्रक्रिया तय करने के लिए संगठनों को क्या करना चाहिए? -
आईडीआर इंटरव्यूज । बेज़वाड़ा विल्सन
सफ़ाई कर्मचारियों द्वारा मैनुअल स्कैवेंजिंग की प्रथा के विरुद्ध ताउम्र संघर्ष करनेवाले बेज़वाड़ा विल्सन दलितों के नेतृत्व में ज़मीनी स्तर पर तैयार किए जाने वाले आंदोलन की बात करते हैं। वह चाहते हैं कि यह आंदोलन इस अमानवीय प्रथा का अंत करने में मददगार साबित हो और इस प्रथा के शिकार लोगों को इससे मुक्ति मिल सके। -
आत्महत्या की घटनाओं के रोकथाम में मीडिया रिपोर्टिंग की ताक़त
इस तथ्य के बावजूद कि मीडिया आत्महत्या के मामलों की संख्या पर उल्लेखनीय असर डाल सकता है, भारत में इससे जुड़ी रिपोर्टिंग की गुणवत्ता बहुत निचले स्तर की है। ऐसे में स्थिति को बेहतर बनाने के लिए क्या बदले जाने की ज़रूरत है? -
सामाजिक बदलाव के लिए ज़मीनी अनुभवों से सीखना
सुजाता खांडेकर कोरो की संस्थापक निदेशक हैं। आईडीआर से उनकी इस बातचीत में जानिए कि सामाजिक परिवर्तन की कोशिशों में जमीनी स्तर के ज्ञान और अनुभव को कैसे शामिल किया जा सकता है। -
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लक्ष्य से ज़्यादा प्रतिभाओं को प्राथमिकता दें
गूंज के उदाहरण से समझिए कि एनजीओ का अपने नैतिक मूल्यों के प्रति ईमानदार रहना और अपनी टीम को महत्व देना संगठनात्मक विकास के लिए कितना जरूरी है। -
मज़बूत एनजीओ बनाने की लागत जो भी हो, लगाएं
प्रशासनिक लागतों की अंडरफंडिंग उस प्रभाव को कम करती है, जिसके लिए फ़ंडर और एनजीओ दोनों प्रयास करते हैं। परोपकार से इसे ठीक किया जा सकता है।