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समाजसेवी संस्थाओं को सरकार के साथ जुड़कर काम क्यों करना चाहिए?
सरकार के साथ जुड़कर काम करने की चाह रखने वाली, समाजसेवी संस्थाओं के लिए पहले सरकार की विशेषता को भी अच्छे से समझना जरूरी है। -
साल 2024 में विकास के लिहाज से हमने क्या सीखा?
सुनिए चर्चा सामाजिक समस्याओं के समाधान में आने वाली बॉटलनेक, सिस्टम थिंकिंग और इससे जुड़े कई और विषयों पर। -
क्यों मेघालय में तिवा जनजाति को नाम से लेकर भाषा तक बदलनी पड़ रही है?
तिवा लोग असम के मैदानी और पहाड़ी इलाकों में रहते हैं जहां उन्हें अनुसूचित जनजाति माना गया है लेकिन मेघालय में ऐसा नहीं है। -
महिला सशक्तिकरण की सबसे बड़ी बाधा बनने वाला पितृसत्तात्मक समझौता क्या है?
कई बार महिलाएं उनके दमन के कारकों के खिलाफ खड़े होने की बजाय उन्हें मज़बूत करने लगती हैं जो उन्हें केवल अस्थाई लाभ दे सकते हैं। -
संपत्ति समावेशन क्या है और यह नागरिक अधिकारों से कैसे जुड़ता है?
भारत में संपत्ति क्षेत्र पर हालिया अध्ययन ने हाशिए पर रहने वाले और कमजोर समुदायों के लिए संपत्ति अधिकारों की चुनौतियों को उजागर किया है। -
पंचायती राज संस्थान जल सुरक्षा को तेजी से सुनिश्चित कर सकते हैं
जल प्रबंधन के स्थायी समाधानों की योजना बनाने और उन्हें सबसे उपयुक्त तरीके से ज़मीन पर लागू करने में स्थानीय सरकारें सबसे कारगर हो सकती हैं। -
हमारे संविधान में क्या-क्या लिखा है?
वी, द पीपल अभियान के इस वीडियो से जानिए भारतीय संविधान की संरचना और उसके अलग-अलग भागों के बारे में। -
भारत के अपराध कानून अपने नागरिकों को सजा कैसे देते हैं?
सुधार के दावों के बावजूद, भारतीय अपराध कानून आज भी बहुत असंगत तरीके सजा देते, नागरिक मामलों का अपराधीकरण करते और अंग्रेजों के जमाने के मूल्यों को ढोते दिखते हैं। -
अपनी पहचान बनाने के संघर्ष में विमुक्त घुमंतू जनजातियां
ऐतिहासिक रूप से हाशिए पर रहे विमुक्त घुमंतू जनजाति समुदायों ने अंग्रेजी शासन से लेकर आज तक सामाजिक और प्रशासनिक भेदभाव का सामना किया है। देखें, उनकी चुनौतियों और पहचान की लड़ाई की पूरी कहानी। -
हाशिये पर मौजूद युवाओं के लिए मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े प्रयास कैसे होने चाहिए?
युवाओं से जुड़े मानसिक स्वास्थ्य के प्रयास तब अधिक प्रभावी होते हैं जब ये उनके लिए प्रासंगिक, लोगों पर ध्यान केंद्रित करने वाले और समुदाय द्वारा चलाए जाने वाले हों। -
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रोहिंग्या संकट में नागरिक समाज संगठन कैसे मदद कर सकते हैं?
भारत में रोहिंग्या समुदाय को उनके अधिकारों से वंचित किया गया है, वे विस्थापित हैं और अदृश्य कर दिए गए हैं। नागरिक समाज उन्हें एक गरिमामय जीवन तक पहुंचने में कैसे मदद कर सकता है?