सरकार और समर्थन
क्या सरकारी योजनाओं की परीक्षण-प्रक्रिया पर दोबारा विचार की ज़रूरत है?
भारत में पायलट प्रोजेक्ट के ज़रिए सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन प्रक्रिया की व्यवहारिकता का आकलन किया जाता रहा है। यहाँ पीएम कुसुम योजना पर किसानों द्वारा मिलने वाली संभावित प्रतिक्रियाओं का पता लगाने के लिए एक एबीएम अभ्यास का आयोजन किया गया है।पंचायत के ऑनलाइन डाटाबेस को कैसे एक्सेस करें?
ऑनलाइन माध्यमों से आप घर बैठे न केवल ग्राम विकास से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की जानकारी हासिल कर सकते हैं बल्कि दफ्तरों के अनावश्यक चक्कर लगाने से भी बच सकते हैं।आकांक्षी जिलों को सीएसआर फंड का एक सीमित हिस्सा ही मिलता है
आकांक्षी जिला कार्यक्रम का लक्ष्य देश के सबसे कम विकसित क्षेत्रों में विकास करना है लेकिन इस कार्यक्रम के तहत चुने गये जिलों में होने वाला सीएसआर निवेश सीमित है।क्या आप भी बजट समझने से पहले ही उसकी शब्दावली में उलझ जाते हैं?
बजट दस्तावेज़ को ठीक तरह से समझने के लिए ज़रूरी है कि हम इसमें शामिल कठिन शब्दों के मायने समझें।आईडीआर एक्सप्लेन्स: भारत में स्थानीय सरकार
संविधान में विकेन्द्रीकरण की व्यवस्था तो कर दी गई है लेकिन ज़रूरी है कि राज्य भी स्थानीय सरकार की क्षमता को बढ़ाने पर काम करें।सार्वजनिक वितरण प्रणाली के ज़रिए ज्वार-बाजरा को आम लोगों तक पहुंचाना
भारत की सार्वजनिक वितरण प्रणाली मोटे अनाजों (ज्वार, बाजरा, रागी वग़ैरह) को आम लोगों तक पहुंचाने में कैसे मददगार हो सकती है और इस राह की चुनौतियां क्या हैं?भारतीय संविधान के बनने की कहानी क्या है?
भारतीय संविधान निर्माण की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और इससे जुड़े कुछ दिलचस्प तथ्य।आपदा प्रबंधन, केरल और ओडिशा से सीखा जा सकता है
केके शैलजा (पूर्व स्वास्थ्य मंत्री, केरल) और लिबी जॉनसन (ग्राम विकास) से आईडीआर की बातचीत जिसमें वे आपदाओं से निपटने की सरकारी रणनीति और जन-संगठनों के आपसी सहयोग पर बात कर रही हैं।भारत में विकलांगता पेंशन योजना की असफलता के कारण क्या हैं?
भारत में विकलांगता पेंशन योजना के असफल होने की वजह कम आर्थिक मदद, सख्त नियम और अलगाव करने वाले पात्रता मानदंड हैं, इन्हें कैसे बदला जा सकता है?क्या भारत की राजनीतिक व्यवस्था में सुधार का वक्त आ गया है?
हमें राजनीति में खेल के नियमों को बदलने की जरूरत है क्योंकि इसने सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को राजनीतिक प्रक्रिया पर हावी होने दिया है।समाजसेवी संस्थाएं क़ानून निर्माण की प्रक्रिया में जन-सहभागिता को कैसे संभव बनाती हैं
जन-समुदायों को कानून बनाने की प्रक्रिया में शामिल करने के लिए समाजसेवी संस्थाओं की ज़मीनी पकड़ और समझ का फायदा उठाया जा सकता है।