कैपेसिटी बिल्डिंग
नेतृत्व और प्रतिभा, संचार, फंड की व्यवस्था और तकनीक पर सर्वोत्तम अभ्यास (बेस्ट प्रैक्टिस), सीख और कार्यात्मक सलाह।
सरल कोश: फेमिनिज़म
अंग्रेज़ी-हिंदी शब्दकोश: विकास सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले कठिन शब्दों की सरल व्याख्या - फेमिनिज़म।दांव पर ज़िंदगी: अरबों के टेक्सटाइल उद्योग का कड़वा सच
सूरत का भव्य टेक्सटाइल उद्योग भले ही समृद्धि की मिसाल हो, लेकिन इसकी बुनियाद प्रवासी श्रमिकों की बदहाल जीवन परिस्थितियों पर टिकी है।त्रिपुरा में समाजसेवी संगठनों के काम करने के लिए एक गाइड
भौगोलिक अलगाव के अलावा त्रिपुरा में समाजसेवी संगठनों के सामने और भी कई बाधाएं हैं, जिनसे निपटने में उनका लचीलापन और आपसी साझेदारियां मददगार साबित हो सकते हैं।मानसिक स्वास्थ्य क्या है और इस पर बात किए जाने की जरूरत क्यों है?
तनाव से लेकर अवसाद तक, सभी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के हल मौजूद हैं लेकिन वे कौन सी सामाजिक और व्यवस्थागत बाधाएं हैं जो इन तक पहुंचने नहीं देती हैं।सरकार का बजट, संस्थाओं की कैसे मदद कर सकता है?
सरकार का बजट, संस्थाओं के लिए न केवल उसकी नीतियों को जानने का माध्यम है, बल्कि इससे उन्हें अपने कार्यक्रमों की प्लानिंग करने में भी मदद मिल सकती है।सरल कोश: आउटरीच
अंग्रेज़ी-हिंदी शब्दकोश: विकास सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले कठिन शब्दों की सरल व्याख्या - आउटरीच।समाजसेवी संस्थाओं को सरकार के साथ जुड़कर काम क्यों करना चाहिए?
सरकार के साथ जुड़कर काम करने की चाह रखने वाली, समाजसेवी संस्थाओं के लिए पहले सरकार की विशेषता को भी अच्छे से समझना जरूरी है।सरल कोश: स्टेकहोल्डर
अंग्रेज़ी-हिंदी शब्दकोश: विकास सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले कठिन शब्दों की सरल व्याख्या - स्टेकहोल्डर।साल 2024 में हमने जो किताबें पढ़ीं, वे आपको भी क्यों पढ़नी चाहिए?
विकास सेक्टर के अलग-अलग हिस्सों से जुड़ी कुछ किताबें जिन्हें पढ़ना और जिनसे सीखना आपके काम को थोड़ा और बेहतर बनाने में मददगार साबित हो सकता है।फील्ड कार्यकर्ताओं के लिए रिपोर्टिंग से जुड़ी समस्याओं के कुछ सटीक समाधान
रिपोर्टिंग से जुड़ी समस्याओं के लिए जरूरी है कि फील्ड कार्यकर्ता मैनेजर के साथ चर्चा करके समाधान तैयार करें और संस्थाएं इसके लिए गुंजाइश रखें।सरल कोश: 16 डेज ऑफ एक्टिविज्म
अंग्रेजी-हिंदी शब्दकोश: 16 डेज ऑफ एक्टिविज्म शब्द की सरल व्याख्या।देश में शीत लहरों की संख्या क्यों बढ़ रही है?
शोध बताते हैं, जलवायु परिवर्तन के कारण भारत में साल 1982 से 2020 के बीच शीत लहरों की संख्या पांच गुना बढ़ गई है और इससे सबसे अधिक प्रभावित उत्तर भारतीय राज्य होते हैं।