हल्का-फुल्का
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अप्रेजल का महीना: क्या हुआ तेरा वादा?
अप्रेजल के महीने में संस्थाओं के कर्मचारियों की उम्मीदें सातवें आसमान पर रहती हैं। हालांकि अप्रेजल की घोषणा होते ही उन्हें आसमान से जमीन पर उतरने में ज्यादा समय नहीं लगता। -
विकास सेक्टर की होली पार्टी के लिए बॉलीवुड प्लेलिस्ट
अगर आप विकास सेक्टर में अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते हैं, तो आपके लिए बॉलीवुड का कौन सा गाना सबसे सटीक रहेगा? -
ये सब तो कहना ही पड़ता है: ‘महिला दिवस’ विशेषांक
महिलाओं की स्थिति वास्तव में बदले या ना बदले, लेकिन भाषणों की बड़ी-बड़ी बातें कभी नहीं बदलेंगी। सार्वजनिक मंचों पर उन बातों को दोहराना जरूरी है, जिनसे लगे कि सब ठीक चल रहा है। -
एक वर्चुअल वर्कशॉप कैसे (न) करें
यह एक सत्य घटना पर आधारित नहीं है! -
शायर कार्यकर्ता का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू
शायर कार्यकर्ता से आईडीआर की काल्पनिक बातचीत, जिसका वास्तविक घटनाओं से भरपूर मेल है। -
बजट और हम: विकास सेक्टर की एक पुरानी कहानी के कुछ नए दृश्य
नए बजट से विकास सेक्टर में काम करने वालों को होने या ना होने वाले कुछ फायदे और नुकसान, जिनका ख्याल हमें आया। -
पाताल लोक गाइड: जमीनी कार्यकर्ता विशाल आयोजनों में हिम्मत कैसे बनाए रखें
जब एक जमीनी कार्यकर्ता महानगर में आयोजित किसी ‘लग्जरी’ कार्यशाला में पहुंचता है तो मन खुद को ‘इंस्पेक्टर हाथीराम’ और आयोजन को 'पाताल लोक' सा महसूस करता है। -
एनजीओ वालों से ना पूछो: इस पेशे में कितना पैसा, कैसा पैसा?
समाज को बदलने के बुलंद इरादों लेकिन उतनी ही कम सैलरी के चलते एनजीओ वर्कर को समाज और परिवार जिस तरह से देखता है, उसमें जमीन-आसमान का फर्क दिखता है। -
गणतंत्र दिवस पर दिल में देशभक्ति के अलावा और कौन-कौन से भाव आते हैं?
गणतंत्र दिवस पर स्कूल के बच्चों से लेकर शिक्षक, सरपंच और बाकी तमाम लोगों की चिंताओं की वजहें एक-दूसरे से एकदम अलग होती हैं। -
लड़कियां क्या कुछ नहीं कर सकती हैं लेकिन…
स्कूल से लेकर नौकरी तक और नौकरी से लेकर चांद तक, महिलाएं हर जगह पहुंच सकती हैं लेकिन वहां से लौटने के बाद उन्हें कुछ तय काम करने ही हैं। -
नया साल, नया संकल्प! लेकिन दफ्तर वही पुराना?
सभी की तरह सामाजिक क्षेत्र के कर्मचारी भी नए साल में बड़े संकल्प लेते हैं। यहां कुछ ऐसे ही मजेदार संकल्पों का ज़िक्र है जिन्हे वे कभी नहीं निभा पाएंगे! -
चर्चा शहरी, चुनौती जमीनी
एकाध अपवाद छोड़ दें तो विकास सेक्टर की ज्यादातर कॉन्फ्रेंस और सम्मेलन जमीनी स्तर से दूर ही नजर आते हैं।