हल्का-फुल्का
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एक बार फील्ड में: जब शुद्ध हिंदी बोलने के चक्कर में गड़बड़ हो गई
जमीनी कार्यकर्ताओं को समुदाय के साथ हिंदी में ही बात करने की समझाइश दी जाती है, इसी कोशिश के चलते हुई गड़बड़ी का एक दिलचस्प किस्सा। -
जब एक इंजीनियर विकास सेक्टर में काम करने आता है!
इंजीनियरिंग की पढ़ाई किए हुए लोग और उनके किस्से हर जगह मिल जाएंगे। विकास सेक्टर भी उनसे अछूता नहीं है। आइए, एक नज़र डालते हैं। -
सपने ढोते हट्टे-कट्टे…पर नेतृत्व का कंधा न छूटे!
सामाजिक सेक्टर में काम करते हुए अक्सर जमीनी नेतृत्व को अहमियत दी जाती है, लेकिन हम इसे कितनी गंभीरता लेते हैं, यहां देखिए। -
क्या युवा सामाजिक मुद्दों में रुचि लेता है?
ये आंकड़े जो बता रहे हैं, ये आंकड़े क्या बता रहे हैं। -
कल के लिए लड़ाई: आज़ादी से अब तक
भले दौर अलग हों, मुद्दे अलग हों लेकिन युवा हर बार देश में विरोध की आवाज़ बनते रहे हैं। -
कहीं धूप, कहीं छांव!
बेमौसम बारिश का जहां युवा आनंद ले रहे हैं, वहीं फसलों को नुकसान हो रहा है, युवाओं के लिए यह मौसम कुछ अलग ही कहानी बयां कर रहा है। -
बड़े आंदोलनों की बड़ी बातें
आज सामाजिक आंदोलन चलाने के लिए सबसे जरूर उपकरण सोशल मीडिया है लेकिन उससे भी ज़रूरी क्या है? -
युवाओं पर उम्मीदों का इतना-कितना बोझ?
परिवार, समाज और बाजार से लेकर सरकारों तक को युवाओं से उम्मीद है लेकिन युवा किससे उम्मीद करें? -
सड़क कब और क्यों बनती है?
सालों पुराने सवाल का जवाब, शायद ही कोई जानता है। -
आपकी फंडरेजिंग पिच के लिए नवजोत सिंह सिद्धू की कमेंट्री
क्योंकि हर फंडर मीटिंग, विश्व कप फाइनल जैसी महसूस होती है। -
जब आप वर्कशॉप में जाते हैं…
कभी आप वर्कशॉप में जाते हैं और कभी आपको जाना पड़ता है, दोनों ही सूरतों में आपके मन का हाल। -
विकास सेक्टर में आपका जीवन
पंचायत वेबसीरीज की नज़र से समझिए।