मानवाधिकार
आईडीआर इंटरव्यूज़ | ए रेवती
ट्रांस महिला के रूप में अपनी पहचान अपनाने से लेकर जमातों तक—ए. रेवती बता रही हैं कि उन्होंने समुदाय को एकजुट करना और थिएटर व लेखन के ज़रिए अपने दिल की बात कहना कैसे सीखा।कड़े श्रम कानून कैसे बनते हैं प्रगति में बाधा?
पुलियाबाजी के इस पॉडकास्ट में जानिए कि श्रम कानूनों में आए बदलाव कौन से जरूरी सवाल उठाते हैं, जिनके जवाब तलाशा जाना महत्वपूर्ण है।ई-केवायसी: भोजन के अधिकार की राह में खड़ी नई दीवार
राशन कार्ड के लिए ई-केवायसी प्रक्रिया में अस्पष्टता और इसकी असफलता, सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत लोगों की भोजन तक पहुंच को खतरे में डाल रही है।स्वतंत्रता दिवस सेलः नो ऑफर ऑन रोटी!
स्वतंत्रता के आठ दशक बाद भी करोड़ों लोग भोजन जैसे मौलिक अधिकार से वंचित हैं। क्या आजादी का मतलब यही है?शहर में बेघर, ऊपर से ठंड का कहर
अक्सर शहरों को सुंदर बनाए जाने के दौरान बेघर लोगों से उनके अस्थाई आश्रय भी छीन लिए जाते हैं जो ठंड और बारिश में उनका जीवन और कठिन बना देता है।संपत्ति समावेशन क्या है और यह नागरिक अधिकारों से कैसे जुड़ता है?
भारत में संपत्ति क्षेत्र पर हालिया अध्ययन ने हाशिए पर रहने वाले और कमजोर समुदायों के लिए संपत्ति अधिकारों की चुनौतियों को उजागर किया है।