विकास सेक्टर
भारत के श्रम बल में महिलाओं के भागीदारी से जुड़े प्रयास क्या बताते हैं?
दुनिया के अन्य देशों की तुलना में, भारत में महिला श्रम बल की भागीदारी की दर कम क्यों है और इसे बदलने के लिए क्या किए जाने की जरूरत है।फंडरेजिंग के लिए ऑनलाइन माध्यमों का सही इस्तेमाल कैसे करें?
संगठन की वेबसाइट से फंडरेजिंग करने और क्राउडफंडिग में से एक चुनने की शर्त जरूरी नहीं है क्योंकि दोनों तरीक़ों का एक साथ इस्तेमाल करने के विकल्प भी मौजूद हैं।भारत के भूमि क़ानून महिलाओं को भूमि अधिकार दिला पाने में सक्षम क्यों नहीं हैं?
भारत के भूमि क़ानून सैद्धांतिक रूप से तो महिलाओं को भूमि अधिकार देते हैं लेकिन इन्हें जिस तरह से लागू किया जाता है, वह एक बड़ी बाधा है।मुख्यधारा के मीडिया से भारत के आदिवासी समुदाय गायब हैं
शिखा मंडी संथाली भाषा में काम करने वाली भारत की पहली रेडियो जॉकी हैं और यहां वे जनजातीय समुदायों के मीडिया प्रतिनिधित्व और उसके असर पर बात कर रही हैं।बैंक महिलाओं के वित्तीय समावेशन को कैसे संभव बना सकते हैं
पीएमजेडीवाय जैसी योजनाओं का लाभ उठाने के बावजूद निम्न आयवर्ग वाले घरों की महिलाएं बचत के लिए बैंकों के इस्तेमाल से क्यों झिझकती हैं और उनके नज़रिए को कैसे बदला जा सकता है?समाजसेवी संगठन अपने कामकाज को डिजिटल कैसे बनाएं?
तकनीक से जुड़े कुछ सबक़ जो समाजसेवी संस्थाओं के उन लीडर्स के काम आ सकते हैं जो इसका लाभ तो उठाना चाहते हैं लेकिन तरीके नहीं जानते हैं।कश्मीरी जनजातियों के सामने रोज़गार या शिक्षा में से एक को चुनने की दुविधा क्यों है?
मौसमी प्रवासन, कम आय और जाति-आधारित भेदभावों के चलते गुज्जर बकरवाल और चोपन जैसी कश्मीरी जनजातियों तक शिक्षा नहीं पहुंच पा रही है।संगठनात्मक संस्कृति प्रतिभावान कर्मचारियों को रोकने में कैसे मददगार है?
आईएसडीएम और अशोका यूनिवर्सिटी के सीएसआईपी का यह अध्ययन बताता है कि जन-केंद्रित संस्कृति और काम के लिए सहयोगी वातावरण मुहैया करवाने वाले संगठन प्रतिभाओं को हासिल करने और रोके रखने में सफल होते हैं।एक सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजना, जो सबके लिए हो
केंद्र और राज्य सरकारें चाहें तो अपने सीमित आर्थिक बजट के भीतर ही गंभीर और खर्चीली बीमारियों के लिए यह नई तरह की स्वास्थ्य बीमा योजना ला सकती है और हर सामाजिक-आर्थिक वर्ग के लोग इसका फायदा उठा सकते हैं।आर्थिक, सामाजिक या स्वास्थ्य से जुड़े प्रयासों के लिए साझेदारी कैसे करें?
पांच सुझाव जो साझेदारियों को सफल बनाने और इनसे अधिकतम लाभ उठाने के काम आ सकते हैं।बुजुर्गों के लिए बनी एक हेल्पलाइन समाजसेवी संस्थाओं को विस्तार के तरीके सिखाती है
किसी कार्यक्रम को बनाना और उसे विस्तार देना चुनौतीपूर्ण काम है, यह आलेख बुजुर्गों की सहायता के लिए बनाई गई एक हेल्पलाइन के जरिए बताता है कि इन चुनौतियों से कैसे निपटा जा सकता है।समाजसेवी संस्थाएं अपने कार्यक्रमों की साझेदारी कैसे तैयार कर सकती हैं?
साझेदारी से समाजसेवी संस्थाएं अपने विचार और नजरिए को विस्तार दे सकती हैं, ऐसा करने के लिए संगठनों को उपयुक्त साथी की जरूरत होती है जिसमें नीचे दिए गए सुझाव काम आ सकते हैं।